ममता बनर्जी का बड़ा बयान: “अगर मुझे रोकना है तो मुझे मारना पड़ेगा”, TMC में बगावत के बीच बढ़ी सियासी हलचल
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान चर्चा का विषय बनी हुई है। पार्टी में बगावत की खबरों और चुनाव चिह्न को लेकर उठे विवाद के बीच TMC प्रमुख ममता बनर्जी का एक बयान सुर्खियों में आ गया है। उन्होंने कहा कि “अगर मुझे रोकना है तो मुझे मारना पड़ेगा।” इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।
दरअसल, 2 जुलाई को TMC के बागी गुट के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात कर खुद को “असली TMC” के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। इसी घटनाक्रम के बाद ममता बनर्जी ने पार्टी के चुनाव चिह्न को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते हुए स्पष्ट कहा कि “पार्टी का चुनाव चिह्न कहीं नहीं जाएगा। अगर मुझे रोकना है तो मुझे मारना पड़ेगा। अगर हिम्मत है तो खुलकर भाजपा में शामिल हो जाओ। तुम्हें क्या लगता है कि मैं खत्म हो गई हूं? मैं जनता के बीच पार्टी का चुनाव चिह्न लेकर जाऊंगी, मेरी आवाज कोई नहीं दबा सकता। गद्दारी की भी एक सीमा होती है।”
ममता बनर्जी ने बागी नेताओं पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीत हासिल की, वही अब पार्टी के अस्तित्व पर सवाल उठा रहे हैं। उनके मुताबिक, पार्टी ने ही उन नेताओं को राजनीतिक पहचान दी, लेकिन अब वे उसी संगठन के खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि वे भाजपा का समर्थन करते हैं तो खुलकर भाजपा में शामिल हो जाएं।
इसी बीच यह भी चर्चा है कि TMC के कई नेता और विधायक अलग गुट बना चुके हैं। पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे दी है।
उधर, ममता बनर्जी के आवास के बाहर भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। उनके बारुईपुर दौरे से पहले केंद्रीय बलों की तैनाती की गई। यह कदम दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में कथित तौर पर 12 वर्षीय लड़की के साथ रेप और हत्या की घटना के बाद उठाया गया। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने इस सुरक्षा व्यवस्था की आलोचना की है।
TMC सांसद डोला सेन ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी को जनता के बीच जाने से रोकने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इतनी गंभीर घटना के बाद ममता पीड़ित परिवार से मिलने जाना चाहती थीं, लेकिन उनके घर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
वहीं, TMC नेता मदन मित्र ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जैसे अन्य चर्चित मामलों में न्याय की मांग उठी है, वैसे ही बारुईपुर की घटना में भी निष्पक्ष जांच और न्याय मिलना चाहिए।
फिलहाल, TMC के भीतर जारी राजनीतिक घटनाक्रम और ममता बनर्जी के हालिया बयान ने पश्चिम बंगाल की सियासत को फिर से गरमा दिया है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग और पार्टी के भीतर की स्थिति इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है।
