कुदरत का अजूबा! हरियाणा का यह शख्स गर्मियों में ओढ़ता है दो कंबल, सर्दियों में सोता है बर्फ की सिल्ली पर
महेंद्रगढ़ (हरियाणा)। जुलाई के इस महीने में जहां उत्तर भारत में भीषण गर्मी और उमस से आम लोगों का हाल बेहाल है, वहीं हरियाणा में एक ऐसा शख्स भी है जिसके लिए कुदरत के नियम बिल्कुल उल्टे काम करते हैं। जब बाहर का तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच झुलसा रहा होता है, तब यह शख्स बदन पर दो-दो मोटे गर्म कंबल लपेटकर और अलाव (आग) जलाकर बैठता है। पहली बार में यह किसी को मानसिक बीमारी या ढोंग लग सकता है, लेकिन यह एक ऐसा हैरान कर देने वाला सच है जिसने मॉडर्न मेडिकल साइंस और डॉक्टरों की टीम के भी होश उड़ा दिए हैं।
यह अनोखी दास्तान हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के एक छोटे से गांव डेरोली अहीर की है। यहाँ रहने वाले संतलाल अपने इस अनोखे शारीरिक अनुभव के कारण इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर देश भर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। उन्हें लोग अब ‘आठवां अजूबा’ भी कहने लगे हैं।
गर्मियों में ‘विंटर मोड’ और पसीने का नामोनिशान नहीं
आम तौर पर गर्मियों का सीजन आते ही लोग कूलर, एसी और ठंडे पानी का सहारा लेते हैं। लेकिन संतलाल के घर का नजारा इसके बिल्कुल विपरीत होता है। भीषण गर्मी के बावजूद संतलाल को इतनी तेज ठंड महसूस होती है कि वे कंबलों के बिना नहीं रह सकते। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी कड़कड़ाती धूप और भारी कंबलों के बाद भी उनके माथे पर पसीने की एक बूंद तक दिखाई नहीं देती और उनका शरीर पूरी तरह सामान्य रहता है। संतलाल का कहना है, “मुझे बचपन से ही इस मौसम में बहुत तेज ठंड महसूस होती है। बिना कंबल और बिना आग के मेरा गुजारा नहीं हो सकता।”
सर्दियों में ऑन हो जाता है ‘समर मोड’
जैसे ही सर्दियों का मौसम आता है, संतलाल की दिनचर्या आम लोगों को और ज्यादा चौंका देती है। जब दिसंबर-जनवरी के कोहरे में लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते, तब संतलाल सुबह के ठीक 5 बजे गांव के बर्फीले ठंडे तालाब में डुबकी लगाने पहुंच जाते हैं। वे दिन का अधिकांश समय पानी के भीतर ही बिताते हैं क्योंकि सर्दियों में उन्हें शरीर के भीतर तेज गर्मी का अहसास होता है। संतलाल का दावा है कि कड़ाके की ठंड के दौरान वे बर्फ की बड़ी-बड़ी सिल्लियों (Ice Blocks) पर बिना किसी कपड़े या चादर के सीधे लेट जाते हैं।
ग्रामीणों की गवाही: ‘यह कोई स्टंट नहीं, कुदरत का वरदान है’
जब संतलाल की तस्वीरें और वीडियो पहली बार इंटरनेट पर आए, तो कई लोगों ने इसे पब्लिसिटी स्टंट या नाटक करार दिया। लेकिन गांव डेरोली अहीर के लोग इस बात को पूरी तरह सच बताते हैं। ग्रामीणों के बीच संतलाल अपने असली नाम से कम और ‘मौसम विभाग’ के नाम से ज्यादा मशहूर हैं।
गांव वालों का कहना है:
- यह कोई आज का तमाशा या सोशल मीडिया का स्टंट नहीं है, संतलाल बचपन से ही ऐसे हैं।
- उन्होंने संतलाल को हर मौसम के विपरीत जीते हुए देखा है।
- इस अजीबोगरीब लाइफस्टाइल के बावजूद उन्हें आज तक कोई गंभीर बीमारी नहीं हुई है और वे पूरी तरह तंदुरुस्त हैं।
- जिला प्रशासन भी उनकी इस अनोखी स्थिति को देखते हुए उन्हें कई बार सम्मानित कर चुका है।
मेडिकल साइंस भी हैरान, जांच रिपोर्ट में सब नॉर्मल
संतलाल की इस रहस्यमयी शारीरिक स्थिति को समझने के लिए डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कई बड़ी टीमें गांव पहुंचीं। उनके शरीर के तापमान, ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट और न्यूरोलॉजिकल सिस्टम की गहन जांच की गई।
क्या कहता है विज्ञान?
विज्ञान के नियमों के अनुसार, इंसानी दिमाग में ‘हाइपोथैलेमस’ (Hypothalamus) नाम का एक हिस्सा होता है, जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है। यही तय करता है कि कब पसीना निकालना है और कब शरीर को कंपाकर गर्मी पैदा करनी है।
डॉक्टरों को अंदेशा था कि शायद संतलाल के इसी सिस्टम में कोई दुर्लभ गड़बड़ी हो सकती है। लेकिन तमाम टेस्ट और रिपोर्ट्स आने के बाद भी डॉक्टर किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सके। उनकी सभी मेडिकल रिपोर्ट्स बिल्कुल नॉर्मल आईं। डॉक्टर भी हैरान हैं कि कोई इंसान जैविक रूप से (Biologically) मौसम को इस तरह बिल्कुल उल्टा कैसे महसूस कर सकता है। विज्ञान के पास आज भी इस अनोखे ‘ह्यूमन मार्वल’ का कोई स्पष्ट और सटीक जवाब नहीं है।
