यूपी चुनाव 2027: योगी आदित्यनाथ ने दी ‘जीत की गारंटी’, लखनऊ से बंगाल का जिक्र कर अखिलेश यादव का समीकरण बिगाड़ा
उत्तर प्रदेश की सियासत को देश की राजनीति का सबसे बड़ा समंदर माना जाता है, जहाँ मामूली लहरें नहीं, बल्कि सीधे सियासी तूफान उठते हैं। इस वक्त उस तूफान के केंद्र में खड़े हैं गोरखपुर के महंत और सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। योगी आदित्यनाथ आज भारतीय जनता पार्टी (BJP) का वो आक्रामक चेहरा बन चुके हैं, जो चुनावी मैदान में उतर जाएं तो विपक्ष के खेमे में सन्नाटा पसर जाता है। हैदराबाद का स्थानीय चुनाव हो, महाराष्ट्र का रण हो या बिहार की बिसात योगी ने जब-जब हुंकार भरी है, विरोधियों का किला ढह गया है।
अब देश के सबसे बड़े सूबे में साल 2027 के महासंग्राम की तैयारी शुरू हो चुकी है। इसकी एक धारदार झलक हाल ही में लखनऊ में देखने को मिली, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए यूपी फतह करने का बड़ा इशारा कर दिया। बीजेपी के वरिष्ठ राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी में योगी के इस आक्रामक अंदाज ने अखिलेश यादव के सारे सियासी समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है।
शक्तिकेंद्र संयोजकों को योगी का ‘जीत मंत्र’
दरअसल, लखनऊ के प्रेरणास्थल पर बीजेपी ने एक ‘शक्तिकेंद्र संयोजक सम्मेलन’ का आयोजन किया था। इस दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के सामने 2027 चुनाव फतह करने का गुरुमंत्र दिया।
“चुनाव का केंद्र कोई टीवी स्टूडियो नहीं, बल्कि ‘बूथ’ होता है। अगर हमारा बूथ मजबूत होगा, तो चुनाव हमारे पाले में आएगा ही आएगा, क्योंकि मतदाताओं से सीधा संवाद यहीं से शुरू होता है।”
— योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री (उत्तर प्रदेश)
मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए आगे कहा कि जब हमारा शक्तिकेंद्र मजबूत होगा, तो उत्तर प्रदेश में बंगाल जैसी ऐतिहासिक जीत मिलने में कोई कठिनाई नहीं होगी। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जिस बंगाल को घुसपैठ का अड्डा बना दिया गया था, जहाँ अराजकता चरम पर थी और बीजेपी के तमाम कार्यकर्ताओं ने बलिदान दिया, वहाँ हमारी बूथ स्तर की मजबूती ने विरोधियों को पटखनी दी। बंगाल की जीत बताती है कि हमारा शक्तिकेंद्र कितना मजबूत है।
‘दिल्ली बनाम लखनऊ’ का नैरेटिव धुआं-धुआं
बीजेपी के राष्ट्रीय नेताओं के इस लखनऊ दौरे ने विपक्ष के उस नैरेटिव को भी पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है, जिसमें ‘लखनऊ बनाम दिल्ली’ यानी सरकार और संगठन के बीच खींचतान की अफवाहें उड़ाई जा रही थीं। लखनऊ में बीजेपी के तमाम शीर्ष नेताओं के साथ मैराथन बैठकें हुईं। इस दौरान केंद्रीय और राज्य के नेतृत्व के बीच गजब का सामंजस्य देखा गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य की एकजुटता की तस्वीरों ने साफ कर दिया कि यूपी बीजेपी में कोई अंतर्विरोध नहीं है। मंच से नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के डबल इंजन के विकास का है।
डबल मोर्चे पर फंसे अखिलेश यादव, खेमे में हड़कंप
योगी के इस आक्रामक अंदाज और बीजेपी के जमीनी दौरों ने विपक्षी दलों में हड़कंप मचा दिया है। खबरों के मुताबिक, बीजेपी की इस चौतरफा घेराबंदी के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने अपने विधायकों और सांसदों की एक इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो समाजवादी पार्टी इस वक्त यूपी चुनाव से पहले एक नहीं, बल्कि दो-दो मोर्चों पर बुरी तरह फंस चुकी है:
- बीजेपी की अभेद्य बूथ रणनीति: बीजेपी सीधे सपा के कोर वोट बैंक और बूथों में सेंध लगा रही है। योगी आदित्यनाथ अपनी रैलियों से यह संदेश देने में कामयाब रहे हैं कि कानून-व्यवस्था से लेकर विकास तक, उनकी सरकार ने ‘एंटी-इनकंबेंसी’ (सत्ता विरोधी लहर) के हर चांस को खत्म कर दिया है।
- कांग्रेस के साथ गठबंधन का सिरदर्द: लोकसभा चुनाव में साथ दिखने वाली कांग्रेस अब विधानसभा चुनाव से पहले सपा के लिए गले की फांस बनती दिख रही है। सीटों के बंटवारे और प्रदेश में अपने-अपने वर्चस्व को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच अंदरूनी कलह की खबरें लगातार छनकर बाहर आ रही हैं।
तीसरी बार योगी या अखिलेश की वापसी?
बीते समय में हमने देखा था कि जब योगी आदित्यनाथ ने पश्चिम बंगाल के चुनावी मैदान में कदम रखा था, तो वहाँ का पूरा माहौल बदल गया था। अब उसी बंगाल मॉडल का उदाहरण देकर योगी ने यूपी के कार्यकर्ताओं को चार्ज कर दिया है। गोरखपुर के महंत अब देश के सबसे बड़े सूबे पर तीसरी बार पूर्ण बहुमत के साथ ताल ठोंक रहे हैं। इन मुलाकातों और बैठकों के बाद यूपी का समीकरण तेजी से बदलता नजर आ रहा है। अब सवाल यही है कि क्या योगी आदित्यनाथ तीसरी बार सीएम बनकर इतिहास रचेंगे या अखिलेश यादव कोई नया उलटफेर कर पाएंगे? फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन यह तय है कि यूपी 2027 का चुनाव बेहद दिलचस्प होने वाला है।
