अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के गाल पर पड़ा तमाचा: सिंगापुर के दिग्गज राजनयिक ने खोली कंगाली और सेना की पोल, भारत के विरोधी धड़े को लगा झटका

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को ‘ग्लोबल प्लेयर’ और ‘शांतिदूत’ साबित करने की पाकिस्तान की हर कोशिश एक बार फिर नाकाम साबित हुई है। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कराने का ढोंग रचने वाले पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर बेहद शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। सिंगापुर के पूर्व विदेश सचिव और बेहद सम्मानित राजदूत बिलहारी कौसिकन ने एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पाकिस्तान की जमीनी हकीकत, उसकी कंगाली और वहां की सेना के अवैध दखल का ऐसा कच्चा चिट्ठा खोला है कि इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक सन्नाटा पसर गया है।

‘परमाणु हथियार न होते, तो …’

सिंगापुर के पूर्व राजनयिक बिलहारी कौसिकन ने पाकिस्तानी कूटनीति और वहां के प्रोपेगैंडा तंत्र को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया। पाकिस्तानी पत्रकारों की मौजूदगी में उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा ‘फेल मुल्क’ (Failed State) है, जो हमेशा तबाही की कगार पर खड़ा रहता है। कौसिकन ने तीखा तंज कसते हुए कहा, “अगर इस देश के पास परमाणु हथियार नहीं होते, तो दुनिया का कोई भी देश इसकी परवाह तक नहीं करता।”

उन्होंने साफ किया कि अमेरिका और ईरान के बीच उपजे तनाव का फायदा उठाने के लिए पाकिस्तानी नेतृत्व ने फुर्ती जरूर दिखाई, लेकिन बड़ी-बड़ी कूटनीतिक नौटंकियों से पाकिस्तान की भूखी जनता का पेट नहीं भरा जा सकता। कौसिकन के इस बयान ने भारत के उन अंदरूनी हलकों और मोदी विरोधी धड़े को भी करारा जवाब दिया है, जो पाकिस्तान की इस तथाकथित मध्यस्थता को उसकी बड़ी कूटनीतिक जीत बताकर भारत सरकार पर सवाल उठा रहे थे।

कश्मीर या भारत नहीं, पाकिस्तान खुद अपनी बर्बादी का जिम्मेदार

सम्मेलन के दौरान जब एक पाकिस्तानी पत्रकार ने देश की बदहाली के लिए हमेशा की तरह भारत को जिम्मेदार ठहराने का पुराना राग अलापा, तो कौसिकन ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने इसे पाकिस्तान का एक घटिया “बहाना” करार दिया। कौसिकन ने बताया कि पाकिस्तान की असली समस्या कोई बाहरी विदेश नीति नहीं, बल्कि उसके अंदर की सड़ चुकी बुनियाद है। अपनी अर्थव्यवस्था का भयानक कुप्रबंधन, जनता को दाने-दाने के लिए तरसाना और दुनिया भर में आतंक फैलाने वाले जिहादी गुटों को पालना ही पाकिस्तान की इस बर्बादी की मुख्य वजह है।

रीढ़विहीन राजनेता और सेना का कब्जा

पाकिस्तान के खोखले राजनीतिक ढांचे को बेनकाब करते हुए पूर्व राजनयिक ने कहा कि वहां के सिविलियन राजनेता पूरी तरह से रीढ़विहीन हैं और उनका सत्ता में होना सिर्फ समय की बर्बादी है। देश की 90% समस्याओं की जड़ वहां की सेना है, जिसके पास असली ताकत है लेकिन देश सुधारने की कोई नीयत नहीं है।

‘मैडम भुट्टो सो रही हैं, उन्हें डिस्टर्ब मत करो’

पाकिस्तान के सामंती और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को उजागर करने के लिए कौसिकन ने 1991 के सिंगापुर एयरलाइंस अपहरण (Highjacking) का एक हैरान करने वाला संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया:

“1991 में जब सिंगापुर के एक विमान को हाईजैक किया गया, तो आतंकवादी तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो से बात करना चाहते थे। रात के ठीक 3 बजे जब सिंगापुर की रेस्क्यू टीम ने सीधे बेनजीर भुट्टो के आवास पर फोन किया और स्टाफ को बताया कि निर्दोष यात्रियों की जान खतरे में है, तुरंत मैडम को फोन दीजिए; तो आगे से जवाब मिला ‘मैडम सो रही हैं, उन्हें डिस्टर्ब नहीं किया जा सकता।’ और यह कहकर फोन काट दिया गया।”

FDI में रिकॉर्ड गिरावट

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति इस समय वेंटिलेटर पर है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के सामने घुटने टेकते हुए पाकिस्तान सरकार ने 17.1 ट्रिलियन रुपये (लगभग 61 बिलियन डॉलर) का एक अत्यंत कड़ा बजट पेश किया है। इस बजट ने पाकिस्तान के गरीब वेतनभोगी वर्ग और छोटे व्यापारियों पर टैक्स का भारी बोझ डाल दिया है, जिससे जनता सड़कों पर त्राहि-त्राहि कर रही है। देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) रिकॉर्ड स्तर पर गिर चुका है और कोई भी विदेशी कंपनी इस डूबते जहाज में निवेश करने को तैयार नहीं है।

भारत की कड़क कूटनीति के आगे लाचार पाकिस्तान

एक तरफ जहाँ पाकिस्तान भीख का कटोरा लेकर कभी सऊदी अरब, कभी चीन तो कभी IMF के दफ्तरों के चक्कर काट रहा है; वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है। भारत की नीति स्पष्ट है कि “आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।” इस कड़क नीति ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह अलग-थलग कर दिया है। आज पाकिस्तान कूटनीतिक रूप से हाशिए पर है और वैश्विक मंच पर उसका असली चेहरा पूरी तरह बेनकाब हो चुका है।

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