सीएम शुभेंदु अधिकारी का बयान चर्चा में, विपक्ष पर बोले लेकिन ममता सरकार के 15 साल पर बोलने से किया इंकार
पश्चिम बंगाल की राजनीति में शुक्रवार को एक ऐसा बयान सामने आया जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी। राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधायकों के लिए आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में लोकतंत्र, विधानसभा की गरिमा और राजनीतिक मर्यादा पर जोर देते हुए ऐसा बयान दिया, जिसे लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
विशेष प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुए मुख्यमंत्री
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता स्थित बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में आयोजित विधायकों के विशेष प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने राज्य के विकास के लिए सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील की।
उन्होंने कहा, “राज्य को आगे ले जाने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है। लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए पक्ष और विपक्ष को कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा।”
34 साल का जिक्र, लेकिन 15 साल पर टिप्पणी से इनकार
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल में एक लंबा दौर ऐसा रहा जब शासन सत्ता के बजाय पार्टी कार्यालयों से चलता था।
उन्होंने कहा, “पहले 34 साल तक जो कुछ भी हुआ, वह सब पार्टी ऑफिस के इशारे पर हुआ। उसके बाद के 15 सालों के बारे में मैं चर्चा नहीं कर रहा हूं।”
मुख्यमंत्री ने इसकी वजह बताते हुए कहा, “मैं उन 15 सालों की चर्चा इसलिए नहीं कर रहा हूं क्योंकि यहां विपक्ष के नेता भी मौजूद हैं और मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए अपनी ही विधानसभा की निंदा करना बिल्कुल भी शोभा नहीं देता।”
बयान को लेकर शुरू हुई राजनीतिक चर्चा
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इसकी अलग-अलग व्याख्या की जा रही है। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों और समर्थकों ने इसे मुख्यमंत्री पद की गरिमा बनाए रखने वाला कदम बताया, जबकि विभिन्न दलों के नेताओं की ओर से इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
