बंगाल में शुभेंदु अधिकारी का चक्रव्यूह: ममता बनर्जी, ऋतब्रत और हुमायूं कबीर… TMC के तीनों गुटों पर सरकार की टेढ़ी नज़र
पश्चिम बंगाल की राजनीति में आए बड़े उलटफेर के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सत्ता गंवाने के महज दो महीने के भीतर ही 28 साल पुरानी तृणमूल कांग्रेस (TMC) तीन अलग-अलग धड़ों में बंट चुकी है। अब राज्य के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार के निशाने पर टीएमसी के ये तीनों ही गुट आ गए हैं।
1. ममता बनर्जी के वफादार गुट पर पहली चोट
हालिया विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त और पार्टी के करीब 60 विधायकों (80 में से) के बागी होने के बाद ममता बनर्जी अपने कुछ वफादार नेताओं के साथ सड़क पर संघर्ष कर रही हैं। ममता गुट 21 जुलाई को कोलकाता में पारंपरिक ‘शहीद दिवस’ रैली के जरिए अपना शक्ति प्रदर्शन करना चाहता था। लेकिन शुभेंदु सरकार ने कानून व्यवस्था और धारा 163 का हवाला देकर इस रैली की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है।
इसके साथ ही, शुभेंदु सरकार ने साल 2011 से 2026 के बीच हुए राशन घोटाले, भर्ती घोटाले और कथित संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच तेज कर दी है। शाहजहां शेख और जहांगीर खान जैसे ममता के करीबी बाहुबलियों पर कानूनी शिकंजा पहले ही कसा जा चुका है।
2. ऋतब्रत बनर्जी का बागी गुट भी निशाने पर
चुनाव के बाद अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव से नाराज होकर टीएमसी के 60 विधायकों के साथ बगावत करने वाले ऋतब्रत बनर्जी ने खुद को विधानसभा में ‘असली टीएमसी’ घोषित कर रखा है। शुरुआत में इस बगावत का फायदा बीजेपी को मिला था, लेकिन अब ऋतब्रत गुट भी सरकार के निशाने पर है।
हाल ही में शुभेंदु सरकार द्वारा विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक की समीक्षा के लिए कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा गया, जिसका ऋतब्रत गुट ने विरोध किया और वॉकआउट कर दिया। इसके बाद सरकार उनके प्रति सख्त हो गई है। ऋतब्रत गुट ने भी ‘शहीद दिवस’ पर अलग रैली करने की इजाजत मांगी थी, जिसे सरकार ने नामंजूर कर दिया है।
3. भड़काऊ बयान देने वाले हुमायूं कबीर पर कानूनी चाबुक
टीएमसी से निलंबित होने के बाद ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ (AJUP) बनाने वाले मुर्शिदाबाद के नौदा से विधायक हुमायूं कबीर इस समय शुभेंदु सरकार के सबसे कड़े निशाने पर हैं। कबीर ने एक जनसभा में बीजेपी समर्थकों को धमकी देते हुए बेहद विवादित और सांप्रदायिक बयान दिया था।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा कि राज्य में इस तरह की गुंडागर्दी और भड़काऊ बयानों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार ने हुमायूं कबीर के खिलाफ रेजिनगर और शक्तिपुर थानों में गंभीर आपराधिक मामले दर्ज करवा दिए हैं।
