ममता की करीबी डोला सेन के वायरल वीडियो ने मचाया बवाल, उठे नए सवाल
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। सोशल मीडिया पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की नेता डोला सेन का एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसमें वह पार्टी नेताओं से कथित तौर पर “कट मनी” वसूली और उसके बंटवारे को लेकर बात कर रही हैं।
हालांकि, इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और न ही इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि किसी आधिकारिक एजेंसी या विश्वसनीय स्रोत द्वारा की गई है।
वायरल वीडियो में क्या दावा किया जा रहा है?
सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि डोला सेन अपने नेताओं से कह रही हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में “कट मनी” इकट्ठा करें, उसमें से 25 प्रतिशत अपने पास रखें और 75 प्रतिशत पार्टी फंड में जमा कर दें।
वीडियो साझा करने वाले कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसी तरह के दावे किए हैं, जिसके बाद यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया और राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं
यह ध्यान रखना जरूरी है कि वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो किस संदर्भ में रिकॉर्ड किया गया था, उसमें की गई बातें पूरी तरह सही हैं या नहीं, अथवा उसमें किसी प्रकार की एडिटिंग हुई है या नहीं—इन सभी पहलुओं की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में केवल वायरल वीडियो के आधार पर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या पश्चिम बंगाल में टीएमसी शासन के दौरान “कट मनी” या अवैध वसूली जैसी गतिविधियां होती थीं। हालांकि, इन दावों को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
दूसरी ओर, टीएमसी या डोला सेन की ओर से इस वायरल वीडियो पर क्या प्रतिक्रिया दी गई है, इस संबंध में भी स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
बागी नेताओं के खिलाफ TMC की कार्रवाई
इसी बीच तृणमूल कांग्रेस ने अपने कुछ बागी नेताओं के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि कुछ नेताओं ने बिना संगठन की अनुमति के बैठकें आयोजित कीं और पार्टी के नाम व चुनाव चिन्ह का अनधिकृत उपयोग किया।
यह शिकायत डोला सेन की ओर से दर्ज कराई गई है। शिकायत में कहा गया है कि संबंधित नेताओं ने पार्टी के आधिकारिक ढांचे को चुनौती देने का प्रयास किया, जो अनुशासनहीनता के साथ-साथ कानूनी रूप से भी गंभीर मामला है।
