प्रियंका चतुर्वेदी का ‘ट्वीट बाण’ और कांग्रेस के झूठे नैरेटिव की हवा
महाराष्ट्र की राजनीति की उठा-पटक अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुई थी कि उद्धव गुट की तेजतर्रार सांसद प्रियंका चतुर्वेदी के एक ट्वीट ने इंडिया ब्लॉक के भीतर ही बड़ा बवाल मचा दिया है। प्रियंका ने अपनी पूर्व पार्टी और मौजूदा सहयोगी कांग्रेस को ऐसा आईना दिखाया है कि पवन खेड़ा और सुप्रिया श्रीनेत जैसे नैरेटिव सेटर्स को मुंह की खानी पड़ी है।
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर कांग्रेसी इकोसिस्टम द्वारा एक नैरेटिव गढ़ने की पुरजोर कोशिश की गई। दावा किया गया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में शहीद हुए देश के जांबाज वीरों के नामों को मोदी सरकार ने एक साल तक छिपाकर रखा और इस तरह शहीदों का अपमान किया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इस नैरेटिव को खूब भुनाने की कोशिश की गई, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली।
ऑपरेशन सिंदूर के वक्त जो भी सैनिक और जवान शहीद हुए थे, उनकी शहादत को पिछले साल 11 मई 2025 को ही डीजीएमओ (DGMO) ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया था। इस पूरे विवाद के बीच प्रियंका चतुर्वेदी ने उसी डीजीएमओ की प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला देते हुए ट्वीट किया और कांग्रेस के गढ़े जा रहे झूठ का पूरी तरह पर्दाफाश कर दिया। उन्होंने साफ किया कि उस वक्त तकनीकी कारणों से पांच वीरों की शहादत तुरंत स्वीकार की गई थी क्योंकि एक जवान अस्पताल में भर्ती थे, जिनका जून में इलाज के दौरान निधन हुआ।
क्या बीजेपी का रुख करने वाली हैं प्रियंका चतुर्वेदी?
कांग्रेस के इस झूठे नैरेटिव को बेनकाब करने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाज़ार बेहद गर्म हो गया है। कई पॉलिटिकल पंडित यह सवाल उठाने लगे हैं कि क्या प्रियंका चतुर्वेदी अब भाजपा का रुख कर सकती हैं? यह पहली बार नहीं है जब राष्ट्रीय सुरक्षा या शूरवीरता के मुद्दों पर प्रियंका चतुर्वेदी ने विपक्ष से अलग हटकर सच का साथ दिया हो।
राजनीतिक सफर की बात करें तो प्रियंका ने अपनी सक्रिय राजनीति कांग्रेस से शुरू की थी, जिसके बाद वह अविभाजित शिवसेना में शामिल हुईं। शिवसेना में फूट पड़ने के बाद भी वह उद्धव ठाकरे के साथ खड़ी रहीं। हालांकि, पिछले दिनों उद्धव ठाकरे द्वारा उनकी राज्यसभा सीट को रिटेन न किए जाने के बाद से ही अंदरूनी नाराजगी की खबरें आ रही थीं। संजय राउत ने उस वक्त शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी और संख्याबल की कमी का बहाना बनाया था, लेकिन प्रियंका का यह ताजा ट्वीट बताता है कि परदे के पीछे कोई बड़ी सियासी खिचड़ी पक रही है। हालांकि प्रियंका इन दावों का खंडन करती रही हैं, लेकिन राजनीति में संभावनाओं के द्वार कभी बंद नहीं होते।
