कांग्रेस के कथित वीडियो पर सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश, रामभक्तों के लिए ‘अपमानजनक’ शब्द के इस्तेमाल का आरोप
सोशल मीडिया पर जारी राजनीतिक खींचतान के बीच प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस एक बड़े विवाद में घिरती नजर आ रही है। कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट किए गए एक कथित वीडियो को लेकर इंटरनेट पर भारी आक्रोश देखा जा रहा है। आरोप है कि इस वीडियो में अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं और हिंदू समाज के लिए अत्यंत अमर्यादित और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
वायरल हो रहे इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सांसद कंगना रनौत सहित उन लाखों श्रद्धालुओं के विजुअल्स दिखाए गए हैं, जो अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर के उद्घाटन और दर्शन के लिए पहुंचे थे।
वीडियो के वायरल होते ही सनातन धर्म के अनुयायियों और आम यूज़र्स का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों का कहना है कि दशकों तक देश पर राज करने वाली एक राष्ट्रीय पार्टी से ऐसी भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती। यूज़र्स ने इसे देश के बहुसंख्यक समाज, उनकी आस्था और सदियों पुरानी संस्कृति का सीधा अपमान करार दिया है। सोशल मीडिया पर लोग इसे कांग्रेस का ‘असली चेहरा’ बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
आंकड़ों के आईने में कांग्रेस की घेराबंदी
इस विवाद के बाद आलोचकों और राजनीतिक विश्लेषकों ने कांग्रेस के ही पारंपरिक वोट बैंक के आंकड़े सामने रखकर पार्टी को घेरा है। इतिहास गवाह है कि नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से लेकर मनमोहन सिंह तक, कांग्रेस को सत्ता के शीर्ष पर बनाए रखने में देश के हिंदू समाज की बड़ी भूमिका रही है।
हालिया चुनावों के आंकड़े भी कुछ ऐसा ही बयां करते हैं:
- 2019 लोकसभा चुनाव: देश के लगभग 20 फीसदी हिंदू मतदाताओं ने कांग्रेस पर भरोसा जताया था।
- 2024 लोकसभा चुनाव: यह आंकड़ा 2 फीसदी बढ़कर 22 फीसदी तक पहुंच गया।
- इंडी (I.N.D.I.A.) गठबंधन: देश के 33 फीसदी हिंदुओं का वोट इस गठबंधन को मिला।
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि ऐसी अभद्र भाषा का इस्तेमाल करके कांग्रेस न केवल अपने विरोधियों का, बल्कि उन 22 फीसदी हिंदू वोटर्स का भी सरेआम अपमान कर रही है, जिन्होंने लोकतंत्र में ईवीएम (EVM) का बटन दबाकर उन पर भरोसा जताया था।
‘चुनावी जनेऊ’ बनाम ‘असली चेहरा’
विपक्ष और आलोचकों का आरोप है कि कांग्रेस का यह रवैया उनकी दोहरी राजनीति को उजागर करता है। चुनाव आते ही जो नेता जनेऊ धारण कर लेते हैं, मंदिरों के चक्कर काटने लगते हैं और खुद को कश्मीरी ब्राह्मण बताने से नहीं चूकते, वे चुनाव खत्म होते ही राम मंदिर उत्सव में शामिल होने वाली जनता को ‘मूर्ख’ समझने लगते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, सदियों के इंतजार के बाद अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर का निर्माण और देश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की इस ऐतिहासिक घटना को कुछ राजनीतिक दल पचा नहीं पा रहे हैं, जिसके कारण अब सोशल मीडिया पर इस तरह की अभद्र टिप्पणियों का सहारा लिया जा रहा है।
