अग्नि मिसाइल से लेकर हवाई जहाजों को ‘दृष्टि’ देने तक, जानिए कौन हैं पद्मश्री डॉ. शुभा वेंकटेश अयंगर

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को आयोजित दूसरे सिविल अलंकरण समारोह में देश के प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कार प्रदान किए। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। इन्हीं में एक नाम था डॉ. शुभा वेंकटेश अयंगर का, जिन्हें विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया। डॉ. अयंगर ने CSIR-नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेट्री (NAL) में करीब 46 वर्षों तक सेवाएं दी हैं।

कौन हैं डॉ. शुभा वेंकटेश अयंगर?

बेंगलुरु विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई के दौरान डॉ. अयंगर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया था। उन्हें शिक्षा के दौरान कई स्वर्ण पदक भी मिले। बाद में उन्होंने एयरोस्पेस तकनीक और विमानन सुरक्षा के क्षेत्र में लंबा शोध कार्य किया और भारत की प्रमुख वैज्ञानिकों में शामिल हुईं।

‘दृष्टि’ जिसने बदल दी भारतीय विमानन सुरक्षा

डॉ. अयंगर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है ‘दृष्टि’ प्रणाली का विकास। यह भारत की पहली स्वदेशी रनवे विजिबिलिटी मापने वाली तकनीक है, जो खराब मौसम, कोहरे, बारिश और धूलभरी परिस्थितियों में पायलटों को रनवे की दृश्यता संबंधी सटीक जानकारी उपलब्ध कराती है।

आज यह प्रणाली देश के सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों और भारतीय वायुसेना के कई ठिकानों पर उपयोग की जा रही है। इससे भारत की विदेशी तकनीकों पर निर्भरता कम हुई है और करोड़ों रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) ने भी इस तकनीक को सराहा है।

अग्नि मिसाइल और अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भी अहम योगदान

डॉ. शुभा अयंगर का योगदान केवल विमानन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अग्नि मिसाइल कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण तकनीकी समस्या को हल करने में भूमिका निभाई, जिसके कारण मिसाइल अपने लक्ष्य तक सटीक रूप से पहुंच सकी। इसके अलावा उन्होंने ऐसे स्वदेशी कंपोनेंट्स विकसित किए जो 3000 केल्विन तक के तापमान और मैक-5 की गति को सहन कर सकते हैं। इन तकनीकों का उपयोग मिसाइल प्रणालियों, रैमजेट-स्क्रैमजेट इंजनों और भारत के अंतरिक्ष प्रक्षेपण कार्यक्रमों में किया गया। उनके शोध कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली और उनके कई शोध पत्र नासा की आधिकारिक रिपोर्टों का हिस्सा बने।

43 पुरस्कारों से हो चुकी हैं सम्मानित

डॉ. अयंगर को उनके वैज्ञानिक योगदान के लिए अब तक 43 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। वर्ष 2015 में उन्हें देश का पहला राष्ट्रीय ‘मेक इन इंडिया’ पुरस्कार भी प्रदान किया गया था। पद्मश्री सम्मान उनके दशकों लंबे वैज्ञानिक योगदान और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में निभाई गई भूमिका की एक और बड़ी पहचान माना जा रहा है।

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