‘सेवा’ के नाम पर शोषण का खेल? केरल के पादरी बिनू पर गंभीर आरोप और शशि थरूर के साथ वायरल तस्वीरों का सच

0
image (10)

केरल से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिस पर मुख्यधारा के मीडिया में वैसी चर्चा नहीं हो रही है जैसी होनी चाहिए। चूंकि मामला रसूखदार चेहरों और राजनीतिक गलियारों से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर एक अजीब सी खामोशी पसरी हुई है। यह पूरा विवाद एक ऐसी संस्था और उसके पादरियों के इर्द-गिर्द घूमता है, जिनकी तारीफ में कांग्रेस के दिग्गज सांसद शशि थरूर भी कभी कसीदे पढ़ा करते थे और उनके साथ मंच साझा करते थे।

आइए समझते हैं कि केरल के पथानामथिट्टा जिले से सामने आई इस कहानी के पीछे की कड़वी हकीकत क्या है।

क्या है पूरा मामला? ‘एलोहिम ग्लोबल वर्शिप सेंटर’ का सच

मामला केरल के पथानामथिट्टा (Pathanamthitta) जिले का है, जहां ‘एलोहिम ग्लोबल वर्शिप सेंटर’ नाम की संस्था चलाने वाले पादरी बिनू वझामुट्टोम विवादों के केंद्र में हैं। इस संस्था पर नाबालिग बच्चों के साथ मारपीट करने, उन्हें अवैध रूप से बंधक बनाकर रखने, जबरन बाल श्रम कराने और उनका मानसिक व शारीरिक शोषण करने के संगीन आरोप लगे हैं।

इस खौफनाक हकीकत से पर्दा तब उठा, जब इडुक्की के एक 17 वर्षीय लड़के ने हिम्मत जुटाकर ‘चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट’ (Child Protection Unit) से संपर्क किया:

  • सपनों का सौदा: पीड़ित लड़के का आरोप है कि उसे अच्छी पढ़ाई, रहने की बेहतरीन सुविधा और एक सुरक्षित भविष्य का सपना दिखाकर इस संस्था में लाया गया था।
  • मजबूरी और मारपीट: संस्था के भीतर कदम रखते ही हकीकत बदल गई। बच्चों से वहां जबरन काम कराया जाने लगा और जब भी किसी ने इसका विरोध किया, तो उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई।
  • जांच का दायरा: इस शिकायत के बाद जब ‘चाइल्ड वेलफेयर कमेटी’ (CWC) ने मामले की जांच शुरू की, तो ऐसे कई संकेत मिले कि वहां रह रहे अन्य बच्चों के साथ भी इसी तरह का उत्पीड़न और शोषण किया जा रहा था।

‘राइस बैग थ्योरी’ और धर्मांतरण का एजेंडा

इस पूरे घटनाक्रम ने सोशल मीडिया पर एक बार फिर ‘राइस बैग थ्योरी’ की बहस को गरमा दिया है। ‘एलोहिम ग्लोबल वर्शिप सेंटर’ के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर पादरी बिनू वझामुट्टोम की प्रार्थना सभाओं के कई वीडियो मौजूद हैं।

स्थानीय लोगों और आलोचकों का सीधा आरोप है कि ऐसी प्रार्थना सभाओं और कथित ‘भविष्य संवारने’ वाले केंद्रों का असली मकसद समाज के सबसे कमजोर, गरीब और संवेदनशील हिंदुओं को निशाना बनाना तथा उन्हें प्रभावित कर ईसाई मजहब में शामिल करना है।

शशि थरूर के साथ वायरल तस्वीरें और राजनीतिक मौन

इस विवाद के सामने आते ही सोशल मीडिया पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर की पुरानी तस्वीरें तेजी से वायरल होने लगीं। मार्च 2024 में शशि थरूर खुद इस संस्था (Elohim Global Worship Center) में पहुंचे थे। उन्होंने गर्व से इन तस्वीरों को साझा करते हुए लिखा था कि वे पादरी बिनू के विशेष निमंत्रण पर वहां गए थे और उन्होंने वहां मौजूद लोगों को संबोधित भी किया था।

जब देश के बड़े और प्रतिष्ठित नेता ऐसी विवादित संस्थाओं के मंच पर खड़े होकर उनके संस्थापकों की तारीफ करते हैं, तो इन संगठनों को एक सामाजिक और राजनीतिक ढाल मिल जाती है। शायद यही वजह है कि आज इस गंभीर बाल शोषण और उत्पीड़न के मामले पर वैसी राजनीतिक हलचल देखने को नहीं मिल रही है, जैसी होनी चाहिए थी।

पादरी का नपा-तुला ‘डैमेज कंट्रोल’

मामले ने जब तूल पकड़ा, तो पादरी बिनू वझामुट्टोम ने हमेशा की तरह यूट्यूब (YouTube) पर एक वीडियो जारी कर सफाई दी। उन्होंने बेहद नपे-तुले अंदाज में कहा कि उन्हें संस्था में किसी भी तरह के उत्पीड़न की कोई जानकारी नहीं थी। उनके अनुसार, यह महज बच्चों के बीच का कोई आपसी विवाद है। इसके साथ ही उन्होंने मामला अदालत में होने का हवाला देकर आगे कुछ भी कहने से पल्ला झाड़ लिया।

निष्कर्ष: यह विचारधारा पूरी तरह ‘रॉन्ग नंबर’ है

केरल से अक्सर ऐसे वीडियो और नैरेटिव सामने आते रहते हैं, जहां एक खास धर्म को सर्वश्रेष्ठ बताने की होड़ लगी रहती है। समस्या किसी धर्म विशेष से नहीं है, समस्या उस आक्रामक और कपटी विचारधारा से है जो सेवा और समाज कल्याण का मुखौटा पहनकर मासूम बच्चों का शोषण करती है और प्रलोभनों के दम पर लोगों पर अपनी धार्मिक पहचान थोपने की कोशिश करती है।

गरीब बच्चों के भविष्य के नाम पर उनके साथ हुआ यह खिलवाड़ सीधे शब्दों में कहें तो पूरी तरह से “रॉन्ग नंबर” है, और इसकी निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है।

Leave a Reply

What’s next

Discover more from Detail News India

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading