भारत ने समुद्र में भी गाड़ा झंडा, शिप रीसाइक्लिंग में बना दुनिया का नंबर-1 देश
भारत ने एक ऐसे क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिसके बारे में आमतौर पर कम चर्चा होती है, लेकिन जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वर्ष 2025 में भारत दुनिया का सबसे बड़ा शिप रीसाइक्लिंग हब बन गया है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में रीसाइक्लिंग के लिए भेजे जाने वाले हर तीन जहाजों में से एक से ज्यादा अब भारत में पुनर्चक्रित हो रहे हैं।
आखिर क्या होती है शिप रीसाइक्लिंग?
जब कोई जहाज अपनी उपयोगी उम्र पूरी कर लेता है, तो उसे तोड़कर उसके स्टील, मशीनरी और अन्य सामग्रियों को दोबारा इस्तेमाल के लिए निकाला जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को शिप रीसाइक्लिंग कहा जाता है। यह न सिर्फ उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सर्कुलर इकोनॉमी को भी मजबूती देती है।
भारत ने कैसे हासिल की यह सफलता?
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने जहाज रीसाइक्लिंग उद्योग को आधुनिक बनाने पर विशेष ध्यान दिया है। पहले जहां भारतीय यार्ड्स को पर्यावरण और सुरक्षा मानकों को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ता था, वहीं अब स्थिति काफी बदल चुकी है। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कानूनी सुधारों, आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल और अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाने की वजह से भारतीय यार्ड्स की विश्वसनीयता बढ़ी है। यही कारण है कि कई वैश्विक शिपिंग कंपनियां अब अपने पुराने जहाजों को भारत में रीसाइक्लिंग के लिए भेजना पसंद कर रही हैं।
अलंग बना वैश्विक पहचान का केंद्र
गुजरात स्थित अलंग शिप रीसाइक्लिंग यार्ड इस सफलता का सबसे बड़ा आधार माना जाता है। वर्षों से अलंग दुनिया के प्रमुख जहाज तोड़ने वाले केंद्रों में शामिल रहा है। अब इसे और आधुनिक बनाने और इसकी क्षमता बढ़ाने की योजना पर काम किया जा रहा है, जिससे भारत आने वाले वर्षों में अपनी बढ़त और मजबूत कर सके।
आगे और बढ़ सकता है भारत
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दशक में हजारों पुराने जहाज सेवा से बाहर होंगे। ऐसे में शिप रीसाइक्लिंग की मांग तेजी से बढ़ने वाली है। यदि भारत इसी गति से सुधार और निवेश जारी रखता है, तो वह केवल रीसाइक्लिंग में ही नहीं बल्कि वैश्विक समुद्री अर्थव्यवस्था के बड़े केंद्र के रूप में भी उभर सकता है। भारत की यह उपलब्धि दिखाती है कि देश अब सिर्फ समुद्री व्यापार का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक समुद्री उद्योग का एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन चुका है।
