यूपी चुनाव से पहले अखिलेश यादव की बढ़ी मुश्किलें: असदुद्दीन ओवैसी ने बहराइच से भरी हुंकार, ‘MY’ समीकरण पर किया सीधा वार

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Owaisi attacks on Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी 6 महीने से ज्यादा का वक्त बाकी है, लेकिन राज्य का सियासी पारा अभी से सातवें आसमान पर पहुंच गया है। यूपी की राजनीति में इस बार समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने चुनौती सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नहीं, बल्कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी बन चुके हैं। बिहार और बंगाल के बाद अब ओवैसी ने यूपी में मजबूती से अपने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं।

सपा के मजबूत गढ़ माने जाने वाले बहराइच में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने अखिलेश यादव के ‘MY’ (मुस्लिम-यादव) समीकरण की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। ओवैसी ने मंच से अखिलेश यादव और उनके पूरे कुनबे पर जमकर निशाना साधा और यूपी के मुस्लिम वोट बैंक को लेकर सीधी चुनौती दे डाली।

बहराइच से पहला उम्मीदवार घोषित

बहराइच की रैली में उमड़ी भारी भीड़ ने जहां समाजवादी पार्टी के नेताओं के पसीने छुड़ा दिए, वहीं ओवैसी ने सिर्फ भाषण नहीं दिया बल्कि चुनावी बिसात पर अपनी पहली चाल भी चल दी। AIMIM ने उत्तर प्रदेश के अपने प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली को बहराइच की मटेरा विधानसभा सीट से अपना आधिकारिक प्रत्याशी घोषित कर दिया है। इस बड़े ऐलान से ओवैसी ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी यूपी में सिर्फ सांकेतिक तौर पर नहीं, बल्कि पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ने आ रही है।

“मुसलमान सिर्फ दरी बिछाने के लिए नहीं है”

ओवैसी ने रैली में अखिलेश यादव और उनके दिवंगत पिता मुलायम सिंह यादव पर निशाना साधते हुए आबादी और सत्ता में हिस्सेदारी का गणित समझाया। ओवैसी ने कहा,

“यूपी में यादवों की आबादी 11 फीसदी है और मुसलमानों की 19 फीसदी। मुस्लिम वोट की बदौलत ही मुलायम सिंह और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे, लेकिन जब मुसलमानों को मौका देने की बात आई तो उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। यूपी का मुसलमान अब किसी के लिए ‘दरी बिछाने’ का काम नहीं करेगा।”

अखिलेश को बताया ‘नाकाम’

AIMIM चीफ ने अखिलेश यादव की राजनीतिक साख पर सवाल उठाते हुए उन्हें एक विफल नेता करार दिया। ओवैसी ने कहा कि 2014 का लोकसभा चुनाव हो, 2017 का विधानसभा चुनाव हो या फिर 2019 का लोकसभा चुनाव अखिलेश यादव हर मोर्चे पर फेल साबित हुए हैं। वह खुद को भाजपा का विकल्प तो बताते हैं, लेकिन हकीकत में भाजपा को रोकने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं।

गठबंधन के लिए रखी बड़ी शर्त

ओवैसी ने सपा और कांग्रेस दोनों को आड़े हाथों लेते हुए साफ लहजे में चेतावनी दी कि अगर किसी को भी AIMIM के साथ गठबंधन करना है, तो वह बराबरी और सम्मान की शर्तों पर ही होगा। सूत्रों के मुताबिक, बहराइच में ओवैसी की इस धमाकेदार रैली और उनके तीखे तेवरों के बाद लखनऊ से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। खबर है कि रैली के तुरंत बाद अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच फोन पर काफी लंबी और गंभीर चर्चा हुई है।

सपा के अंदर मची रार: गठबंधन करें या ‘बी-टीम’ बताएं?

ओवैसी के इस कदम से समाजवादी पार्टी के अंदर दो फाड़ की स्थिति नजर आ रही है। पार्टी का एक धड़ा मानता है कि अगर मुस्लिम वोट बैंक को बिखरने से बचाना है, तो ओवैसी के सामने झुकना पड़ेगा और उन्हें गठबंधन का हिस्सा बनाना होगा। वहीं, दूसरी तरफ कुछ बड़े नेताओं का मानना है कि ओवैसी को ‘बीजेपी की बी-टीम’ बताकर उनसे दूरी बनाए रखनी चाहिए। हालांकि, डर इस बात का है कि अगर ओवैसी अकेले चुनाव लड़ते हैं, तो वह सपा के पारंपरिक मुस्लिम वोटों में बड़ी सेंध लगा सकते हैं, जिससे अखिलेश यादव को भारी राजनीतिक नुकसान हो सकता है।

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