राहुल गांधी को अपनों से ज्यादा खतरा? अशोक गहलोत के बयानों ने बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किलें
कांग्रेस नेता राहुल गांधी इन दिनों लगातार भाजपा और आरएसएस पर हमला बोलते नजर आते हैं। लेकिन अब पार्टी के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरएसएस का जिक्र कर कांग्रेस पर ही सवाल उठा दिया है। उनके हालिया बयानों ने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
आरएसएस और भाजपा के बढ़ने पर क्या बोले गहलोत?
हाल ही में अशोक गहलोत ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि आरएसएस और भाजपा के मजबूत होने के पीछे कांग्रेस का नरम रवैया भी एक वजह रहा है। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस ने शुरुआत से ही आरएसएस और भाजपा के प्रति अधिक सख्त रुख अपनाया होता, तो शायद दोनों संगठन आज इतने प्रभावशाली न बन पाते।
गहलोत ने कहा “मैं सोच-समझकर बोल रहा हूं कि आज आरएसएस यहां तक आया है तो कांग्रेस के नरम रुख के कारण। अगर कांग्रेस भाजपा-आरएसएस के साथ अलग तरीके से व्यवहार करती, तो न भाजपा इतना पनपती और न ही आरएसएस।”
उन्होंने यह भी कहा कि देश में हिंदू राष्ट्र को लेकर जो बहस चल रही है, उसमें औपचारिक घोषणा भले न हुई हो, लेकिन माहौल उस दिशा में जाता दिखाई देता है।
कांग्रेस नेतृत्व पर उठे सवाल?
गहलोत के इस बयान को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों की अलग-अलग राय है। कुछ लोगों का मानना है कि यह कांग्रेस की पुरानी रणनीतियों की आलोचना है, जबकि कुछ इसे मौजूदा नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी के रूप में देख रहे हैं। हालांकि गहलोत ने अपने बयान में राहुल गांधी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके शब्दों को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है।
इंदिरा गांधी का भी किया था जिक्र
यह पहली बार नहीं है जब अशोक गहलोत के बयान चर्चा में आए हों। इससे पहले जयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि यदि इंदिरा गांधी आज जीवित होतीं, तो वह भाजपा जैसी पार्टी के खिलाफ कड़ा कदम उठाने से नहीं हिचकिचातीं।
गहलोत ने कहा था “अगर इंदिरा गांधी जैसी नेता आज जिंदा होतीं तो वह बीजेपी जैसी पार्टी पर प्रतिबंध लगा देतीं। मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि आज का माहौल बेहद खतरनाक है।”
कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर भी दिया था बड़ा बयान
कुछ समय पहले पत्रकारों से बातचीत में अशोक गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर भी खुलकर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा था कि जब सोनिया गांधी ने उनसे जिम्मेदारी लेने को कहा था, तब वह इसके लिए तैयार थे।
गहलोत ने कहा था “कौन कांग्रेस अध्यक्ष नहीं बनना चाहेगा? जब सोनिया गांधी ने मुझसे कहा तो क्या मैं मना करता? मुझे लगता है कि मेरे साथ साजिश की गई। मैं खुद कांग्रेस अध्यक्ष बनना चाहता था।”
क्या पार्टी से नाराज हैं गहलोत?
अशोक गहलोत के लगातार आ रहे बयानों के बाद राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या वह पार्टी की मौजूदा स्थिति और निर्णयों से असंतुष्ट हैं। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस छोड़ने या नेतृत्व के खिलाफ कोई सीधा बयान नहीं दिया है, लेकिन उनके हालिया बयान यह संकेत जरूर देते हैं कि पार्टी के भीतर कई मुद्दों पर अलग-अलग सोच मौजूद है।
