ममता की भाभी और शुभेंदु की मुलाकात ने बढ़ाई सियासी हलचल

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप और सियासी टकराव कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस बार एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के परिवार से जुड़ी कजरी बनर्जी और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

KMC कार्यक्रम में दिखा अलग नज़ारा

सोमवार को कोलकाता नगर निगम (KMC) में आयोजित एक कार्यक्रम में ममता बनर्जी की भाभी कजरी बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कई पूर्व जनप्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान कजरी बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच हुई बातचीत ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कजरी बनर्जी को देखते ही शुभेंदु अधिकारी आगे बढ़े और दोनों के बीच कुछ देर तक बातचीत हुई। इस दौरान कजरी बनर्जी सिर झुकाकर उनकी बातें सुनती नजर आईं, जबकि शुभेंदु भी बेहद सहज अंदाज में बातचीत करते दिखाई दिए।

राजनीतिक गलियारों में क्यों हो रही चर्चा?

यह मुलाकात ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में टीएमसी और बीजेपी के बीच राजनीतिक संघर्ष लगातार चर्चा में है। ऐसे में दोनों पक्षों से जुड़े लोगों का एक मंच पर दिखाई देना स्वाभाविक रूप से अटकलों को जन्म दे रहा है।

कार्यक्रम में कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय सहित कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। मंच पर माला रॉय, फिरहाद हकीम और टीएमसी से जुड़े कई अन्य नेता दिखाई दिए, जबकि सभागार में भाजपा से जुड़े पूर्व पार्षद भी मौजूद थे।

कजरी बनर्जी ने क्या कहा?

कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में कजरी बनर्जी ने स्पष्ट किया कि उन्हें नागरिक सुविधाओं और विकास कार्यों पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया था।

उन्होंने कहा “काउंसलर के तौर पर हमारा जो भी कार्यकाल बचा है, उसके दौरान विकास कार्य बिना किसी बाधा के चलते रहें, इसी उद्देश्य से हमें बुलाया गया है। यह अच्छी बात है कि मुख्यमंत्री ने विपक्ष के लोगों को भी आमंत्रित किया है।”

अन्य नेताओं ने भी दी सफाई

कार्यक्रम में पूर्व पार्षद देबाशीष कुमार, अनन्या बनर्जी, जुई बिस्वास और असीम बोस भी मौजूद रहे। सभी नेताओं ने साफ कहा कि उनकी उपस्थिति का संबंध केवल नागरिक सेवाओं और विकास कार्यों से है, न कि किसी राजनीतिक बदलाव या नए समीकरण से।

हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कोलकाता नगर निगम लंबे समय से टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में टीएमसी से जुड़े नेताओं का इस तरह के कार्यक्रम में प्रमुखता से दिखाई देना चर्चा का विषय बन गया है।

क्या ममता बनर्जी के करीबियों में बढ़ रही है दूरी?

इन तस्वीरों के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। क्या यह सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात थी, या फिर इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है? क्या ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले लोग नए राजनीतिक विकल्पों की तलाश में हैं?फिलहाल इन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। लेकिन इतना जरूर है कि इस मुलाकात ने बंगाल की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।

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