Crude Oil Price Crash: अमेरिका-इरान शांति समझौते से कच्चे तेल में भारी गिरावट, डोनाल्ड ट्रंप के एक्शन से सच हुई Emkay Global की भविष्यवाणी
नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी गिरावट (Crash) दर्ज की गई है. इस बड़ी गिरावट के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा कदम है. अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक ऐतिहासिक शांति समझौते (US-Iran Peace Deal) के बाद कच्चे तेल के दामों में यह भूचाल आया है.
दिलचस्प बात यह है कि इस क्रैश के साथ ही दिग्गज ब्रोकरेज फर्म एम्के ग्लोबल (Emkay Global) की वह भविष्यवाणी भी सच साबित हो गई है, जिसमें उन्होंने कच्चे तेल की कीमतों के नीचे आने का अनुमान जताया था.
डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से बदला ग्लोबल मार्केट का मूड
वैश्विक स्तर पर लंबे समय से चल रहे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) के बीच अमेरिका और ईरान का एक साथ आना बड़ी बात माना जा रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता और कूटनीति के बाद दोनों देशों के बीच शांति समझौता हुआ है. इस समझौते का सीधा असर कच्चे तेल की सप्लाई पर पड़ा है. ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील मिलने की उम्मीद और बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ने की संभावना से क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज गिरावट शुरू हो गई.
Emkay Global की भविष्यवाणी हुई सच
बिजनेस और मार्केट एक्सपर्ट्स के बीच इस वक्त एम्के ग्लोबल (Emkay Global) की खूब चर्चा हो रही है. ब्रोकरेज हाउस ने पहले ही अपनी एक रिसर्च रिपोर्ट में यह साफ कर दिया था कि भू-राजनीतिक मोर्चे पर सुधार होते ही कच्चे तेल की कीमतें क्रैश होंगी. ट्रंप प्रशासन के इस हालिया कदम ने एम्के ग्लोबल के उस आकलन पर पूरी तरह मुहर लगा दी है.
भारत के लिए कितनी बड़ी खुशखबरी?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात (Import) करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल का सस्ता होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी बूस्टर डोज से कम नहीं है:
- पेट्रोल-डीजल हो सकता है सस्ता: कच्चे तेल की कीमतें गिरने से घरेलू तेल कंपनियों (HPCL, BPCL, IOCL) का मुनाफा बढ़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में आम जनता को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी राहत मिल सकती है.
- महंगाई पर लगेगी लगाम: ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट कम होने से रोजमर्रा की चीजों और माल ढुलाई के दाम घटेंगे, जिससे देश में खुदरा महंगाई (Inflation) को कम करने में मदद मिलेगी.
- राजकोषीय घाटा होगा कम: सरकार का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा और क्रूड इंपोर्ट पर होने वाला भारी-भरकम खर्च कम होगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका-ईरान समझौते के तहत कच्चे तेल की सप्लाई सुचारू रूप से वैश्विक बाजार में आने लगी, तो आने वाले हफ्तों में क्रूड ऑयल के दाम कुछ और समय तक दबाव में रह सकते हैं.
