‘Quad के ताबूत में ठोंक दी आखिरी कील!’ अमेरिका के इस एक फैसले पर भड़के शशि थरूर, भारत के लिए क्यों बढ़ा खतरा?
वैश्विक कूटनीति और रक्षा गलियारों से इस वक्त एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने भारत समेत पूरी दुनिया के रणनीतिक विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है.अमेरिका ने अपने आठ साल पुराने एक बड़े फैसले को पलटते हुए ‘यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड’ (USINDOPACOM) का नाम बदलकर एक बार फिर से पुराना नाम यानी ‘यूएस पैसिफिक कमांड’ (USPACOM) कर दिया है।
सुनाई देने में यह सिर्फ एक तकनीकी या नाम का बदलाव लग सकता है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में इसके मायने बहुत गहरे हैं। इसी मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राजनयिक शशि थरूर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘क्वाड’ (Quad) के भविष्य के लिए एक बड़ा झटका बताया है।
शशि थरूर ने क्यों जताई बड़ी चिंता?
शशि थरूर ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि नाम में से ‘इंडो’ (Indo) शब्द को हटा देना कोई सामान्य बात नहीं है। उन्होंने अंदेशा जताया कि यह कदम ‘क्वाड’ (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का रणनीतिक समूह) के ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकता है।
दरअसल, साल 2018 में जब अमेरिका ने अपनी इस मिलिट्री कमांड के नाम में ‘इंडो’ शब्द जोड़ा था, तो वह इस बात का प्रतीक था कि हिंद महासागर (Indian Ocean) और भारत की भूमिका अमेरिकी रक्षा रणनीति के केंद्र में आ चुकी है। लेकिन अब ‘इंडो’ शब्द को हटाना यह दर्शाता है कि अमेरिका का ध्यान एक बार फिर हिंद महासागर से हटकर केवल प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) और चीन के तटीय इलाकों पर केंद्रित हो रहा है।
भारत के लिए क्यों है यह बड़ा झटका?
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका के इस रणनीतिक यू-टर्न के कई गंभीर कूटनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं:
- प्राथमिकताओं में बदलाव: यह साफ संकेत है कि वाशिंगटन अब हिंद महासागर की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी भारत के कंधों पर छोड़कर खुद को सिर्फ प्रशांत क्षेत्र तक सीमित करना चाहता है।
- क्वाड (Quad) का कमजोर होना: ‘इंडो-पैसिफिक’ की अवधारणा ही क्वाड की रीढ़ की हड्डी थी। अगर अमेरिका ही इस शब्द से पीछे हट रहा है, तो इस रणनीतिक समूह की प्रासंगिकता और भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े होना लाजिमी है।
- चीन का बढ़ता हौसला: हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती दादागिरी और घुसपैठ को रोकने के लिए भारत-अमेरिका की यह साझेदारी बेहद अहम थी। अमेरिका के पीछे हटने से इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन बिगड़ सकता है।
बदलते वैश्विक समीकरण
डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत वैश्विक मोर्चों पर अमेरिकी दखल को सीमित करने की कोशिशें लगातार देखी जा रही हैं। इस नाम बदलाव को भी उसी नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जहां अमेरिका अपने रक्षा बजट और सैन्य तैनाती को केवल अपने मुख्य रणनीतिक क्षेत्रों (प्रशांत महासागर) तक ही सीमित रखना चाहता है। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय और रक्षा विशेषज्ञों की इस पर पैनी नजर है कि क्या यह सिर्फ एक प्रशासनिक नाम परिवर्तन है या अमेरिका की रक्षा नीति में कोई बड़ा और गहरा बदलाव आ चुका है।
