चप्पल-डंडे से धोने को तैयार थी महिलाएं, डर से बिस्तर के नीचे छिपा TMC नेता

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पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है। सरकारी आवास योजना में लाभ दिलाने के नाम पर कथित तौर पर लोगों से पैसे वसूलने के आरोपों के बाद एक टीएमसी नेता को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि आरोपी नेता को खुद को बचाने के लिए घर के भीतर बिस्तर के नीचे छिपना पड़ा।

क्या है पूरा मामला?

मामला कूचबिहार जिले के माथाभांगा इलाके का है। आरोपों के केंद्र में टीएमसी नेता शाहिदुल मियां है, जो पेशे से सिविक वॉलंटियर (नगर स्वयंसेवक) बताया जाता है। स्थानीय स्तर पर उसकी पहचान एक प्रभावशाली टीएमसी कार्यकर्ता और नेता के रूप में रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि शाहिदुल मियां ने सरकारी आवास योजना जैसी सरकारी आवास योजनाओं का लाभ दिलाने का भरोसा देकर लोगों से 5,000 रुपये से लेकर 20,000 रुपये तक की रकम वसूली। आरोप है कि इस तरह कथित तौर पर करीब 8 लाख रुपये की उगाही की गई। हालांकि पैसे लेने के बावजूद किसी भी लाभार्थी को आवास योजना का लाभ नहीं मिला।

स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि आवास योजना की किस्त जारी करवाने के नाम पर भी उनसे पैसे मांगे जाते थे।

गुस्साए ग्रामीणों ने किया घर का घेराव

जब लंबे समय तक लोगों को योजना का लाभ नहीं मिला तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में ग्रामीण शाहिदुल मियां के घर पहुंच गए। बताया जा रहा है कि महिलाओं ने भी विरोध प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और चप्पल तथा डंडे लेकर आरोपी के खिलाफ नाराजगी जताई।

भीड़ को अपने घर के बाहर देख शाहिदुल मियां कथित तौर पर अपने घर के एक कमरे में जाकर बिस्तर के नीचे छिप गए। बाद में मौके पर पहुंची पुलिस ने उन्हें बाहर निकाला और अपने साथ थाने ले गई।

पुलिस ने किया गिरफ्तार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने पूछताछ के बाद शाहिदुल मियां को भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और जबरन वसूली से जुड़े आरोपों में औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी आरोपों की पड़ताल की जा रही है।

एक स्थानीय निवासी ने मीडिया से कहा, “हम सिर्फ अपना पैसा वापस चाहते हैं।”

अमित मालवीय ने साधा निशाना

भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी इस मामले को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने घटना का वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि सरकारी आवास योजनाओं के लाभार्थियों से 5,000 से 20,000 रुपये तक की उगाही की गई।

अमित मालवीय ने लिखा कि “जब जनता का गुस्सा भड़का तो टीएमसी नेता भीड़ से बचने के लिए बिस्तर के नीचे छिप गए और बाद में पुलिस को उन्हें वहां से बाहर निकालना पड़ा।” उन्होंने राज्य में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामलों को लेकर भी टीएमसी पर निशाना साधा।

बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहले से ही कई तरह की उठापटक देखने को मिल रही है। विपक्ष लगातार राज्य सरकार और सत्तारूढ़ दल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहा है, जबकि टीएमसी इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताती रही है।

फिलहाल शाहिदुल मियां की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच जारी है और पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है।

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