उत्तराखंड में अतिक्रमण पर बड़ा प्रहार: सरकारी जमीनों को कब्जामुक्त कराने के लिए तेज हुआ अभियान
उत्तराखंड में इन दिनों सरकारी भूमि पर हुए अवैध कब्जों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई जारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल और उधम सिंह नगर सहित कई जिलों में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने का अभियान तेज कर दिया है। राज्य सरकार का कहना है कि वर्षों से सरकारी जमीनों पर हुए अवैध कब्जों को हटाकर सार्वजनिक संपत्तियों को पुनः मुक्त कराया जा रहा है।
सबसे बड़ी कार्रवाई हरिद्वार जिले के धनौरी क्षेत्र में देखने को मिली, जहां सिंचाई विभाग की भूमि पर बने सैकड़ों अवैध ढांचों पर बुलडोजर चलाया गया। प्रशासन के अनुसार यह भूमि मूल रूप से गंगा नहरों के रखरखाव और सिंचाई परियोजनाओं के लिए आरक्षित थी, लेकिन समय के साथ इस पर अवैध कब्जे कर लिए गए। अब प्रशासन इस भूमि को पुनः अपने नियंत्रण में लेने की प्रक्रिया में जुटा हुआ है।
वहीं उधम सिंह नगर जिले में भी भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासन ने 199 लोगों को नोटिस जारी कर सरकारी भूमि खाली करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का आरोप है कि सरकारी जमीनों को महज सौ-सौ रुपये के स्टाम्प पेपर पर बेचकर अवैध रूप से बस्तियां बसाई गईं। मामले की जांच के साथ-साथ भूमि को कब्जामुक्त कराने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
नैनीताल जिले में विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए अतिक्रमण हटाने का कार्य किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि नए पुल निर्माण और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि को खाली कराया जा रहा है। वहीं राजधानी देहरादून में भी सरकारी भूमि पर हुए कब्जों के खिलाफ अभियान लगातार जारी है।
राज्य सरकार का दावा है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं है, बल्कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की “जीरो टॉलरेंस” नीति का हिस्सा है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा और कानून के दायरे में रहते हुए ऐसे सभी मामलों पर कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का कहना है कि उत्तराखंड की सार्वजनिक संपत्तियां राज्य की अमानत हैं और इन्हें किसी भी कीमत पर अवैध कब्जों के हवाले नहीं छोड़ा जा सकता। इसी उद्देश्य से प्रशासन विभिन्न जिलों में अभियान चलाकर सरकारी जमीनों को मुक्त कराने में जुटा हुआ है।
आने वाले दिनों में भी राज्यभर में ऐसे अभियानों के जारी रहने की संभावना जताई जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे न केवल सरकारी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि विकास परियोजनाओं को भी गति मिलेगी और कानून के शासन को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
