NSA अजीत डोभाल का मॉस्को से पाकिस्तान पर कड़ा प्रहार; कहा- ‘आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंड बर्दाश्त नहीं’
NSA Ajit Doval exposes Pakistan: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने रूस के मॉस्को में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान आतंकवाद और इसके संरक्षकों पर तीखा हमला बोला है। डोभाल ने वैश्विक मंच से आतंकवाद को लेकर दुनिया के देशों को आगाह किया और साफ शब्दों में कहा कि इस वैश्विक खतरे के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह का ‘दोहरा मापदंड’ स्वीकार्य नहीं होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूत के रूप में रूस के दौरे पर गए NSA डोभाल ने मॉस्को में शीर्ष रूसी अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
जिम्मेदारी तय करने का वक्त- NSA डोभाल
बैठक के दौरान अजीत डोभाल ने दुनिया भर के देशों को आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने वैश्विक बिरादरी के सामने दो टूक बातें रखीं:
- स्पष्ट विकल्प चुनना होगा: जिम्मेदार देशों को अब यह तय करना होगा कि वे आतंकवाद के प्रायोजकों का समर्थन करते हैं या निर्णायक कार्रवाई के साथ उनका मुकाबला करते हैं।
- दोहरा मापदंड नहीं: आतंकवाद को शह देने और साथ ही आतंकवाद के खिलाफ बड़ी-बड़ी बातें करने की नीति अब नहीं चलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि डोभाल का यह संदेश सिर्फ पाकिस्तान के लिए नहीं, बल्कि तुर्किए जैसे उन देशों के लिए भी था जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से आंखें मूंदकर उसका समर्थन करते हैं।
पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का काला इतिहास
भारत दशकों से सीमा पार से होने वाले पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का दंश झेल रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने पाकिस्तान की नापाक हरकतों की वजह से चार युद्ध लड़े हैं और आज भी सीमा पर लगातार घुसपैठ की कोशिशें होती रहती हैं। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने बार-बार यह साबित किया है कि मुंबई ब्लास्ट, पुलवामा हमला और पहलगाम में हुए आतंकी हमलों के तार सीधे तौर पर पाकिस्तानी जमीन से जुड़े हुए थे। अजीत डोभाल ने मॉस्को जैसे बड़े मंच का इस्तेमाल कर दुनिया को एक बार फिर याद दिलाया कि ‘पीस टॉक’ का ढोंग करने वाला पाकिस्तान असल में आतंकियों का सुरक्षित ठिकाना है।
पाकिस्तान के लिए ‘खौफ’ का दूसरा नाम हैं डोभाल
अजीत डोभाल सिर्फ एक प्रशासनिक पद पर नहीं हैं, बल्कि उन्हें भारत का सबसे बड़ा ‘रणनीतिकार’ माना जाता है। 1980 के दशक में उनके खुफिया अभियानों और अंडरकवर एजेंट के रूप में पाकिस्तान में बिताए गए सालों का इतिहास गवाह है कि वे पाकिस्तानी सेना और वहां के आतंकी नेटवर्क की रग-रग से वाकिफ हैं। यही कारण है कि जब भी डोभाल सुरक्षा के मोर्चे पर कमान संभालते हैं, तो पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो जाती है। वे भारत के खिलाफ पाकिस्तान की हर स्ट्रेटजी को नाकाम करने की क्षमता रखते हैं।
‘मजबूर’ नहीं, अब ‘मजबूत’ भारत की नीति
मॉस्को से आया यह कड़ा संदेश साफ करता है कि भारत अब रक्षात्मक नीति छोड़कर आक्रामक रुख अपना चुका है। भारत ने साफ कर दिया है कि जो देश आज आतंकवाद को पाल-पोस रहे हैं, कल वही आतंक उनके अपने दरवाजे पर भी दस्तक देगा। वैश्विक मंच पर भारत की यह दहाड़ बदलते और आत्मनिर्भर भारत की उस पहचान को दर्शाती है, जो अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं कर सकता।
