सिद्धारमैया की कुर्सी पर खतरा, दिल्ली में कांग्रेस की आपात बैठक; क्या डीके शिवकुमार बनेंगे मुख्यमंत्री?

0
ChatGPT Image May 25, 2026, 06_39_37 PM

Karnataka Political Crisis: कर्नाटक कांग्रेस में लंबे समय से सुलग रही अंदरूनी कलह अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। सियासी गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की कुर्सी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं और अगले 24 घंटे उनके लिए बेहद नाजुक माने जा रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने अचानक दिल्ली में एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए सीएम सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार दोनों को दिल्ली तलब किया गया है, जहाँ राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अहम और अंतिम चर्चा होने की संभावना है।

‘ढाई-ढाई साल’ का फॉर्मूला ?

साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद यह खबर सामने आई थी कि पार्टी ने ‘ढाई-ढाई साल’ का एक पावर-शेयरिंग फॉर्मूला तय किया है। बीते 20 मई को कर्नाटक की इस कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल के 3 साल पूरे कर लिए हैं। तय फॉर्मूले के मुताबिक, सिद्धारमैया का मुख्यमंत्री के तौर पर समय अब पूरा हो चुका है। यही वजह है कि डीके शिवकुमार के समर्थक अब खुलकर सामने आ गए हैं। उनका साफ कहना है कि 2023 की जीत शिवकुमार की कड़ी मेहनत का नतीजा थी, इसलिए आलाकमान को अपना वादा निभाते हुए तुरंत उन्हें मुख्यमंत्री की गद्दी सौंपनी चाहिए।

‘शह और मात’ का सियासी खेल: कैबिनेट फेरबदल बनाम सीएम की कुर्सी

पार्टी के भीतर इस समय दोनों गुटों के बीच वर्चस्व की जंग चल रही है। सूत्रों के अनुसार:

  • सिद्धारमैया की रणनीति: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया चाहते हैं कि आलाकमान तुरंत ‘कैबिनेट में फेरबदल’ को मंजूरी दे दे। अगर ऐसा होता है, तो मंत्रियों को बदलकर वह डीके शिवकुमार के समर्थकों के पर कतर देंगे, जिससे उनका अगले 5 साल तक सीएम बने रहने का रास्ता साफ हो जाएगा।
  • डीके शिवकुमार का स्टैंड: दूसरी तरफ, डीके शिवकुमार इस बार पीछे हटने के मूड में कतई नहीं हैं। उनका स्पष्ट स्टैंड है कि पहले मुख्यमंत्री की कुर्सी का फैसला होगा, कैबिनेट फेरबदल की बात बाद में की जाएगी।

जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से उनके दिल्ली दौरे के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें बुलाया जरूर गया है लेकिन बैठक का एजेंडा उन्हें नहीं पता। वहीं, डीके शिवकुमार भी मीटिंग से ठीक पहले अपने पत्ते खोलने को तैयार नहीं हैं।

सत्ता के संघर्ष में पिसी कर्नाटक की जनता, विकास कार्य ठप

नेताओं के बीच चल रही इस कुर्सी की लड़ाई का सबसे बड़ा खामियाजा कर्नाटक की साढ़े छह करोड़ जनता को भुगतना पड़ रहा है। राज्य में इस समय प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है:

  • अधिकारियों के ट्रांसफर और पोस्टिंग के फैसले अधर में लटके हैं।
  • राज्य में विकास से जुड़े सभी बड़े काम पूरी तरह ठप पड़े हैं।
  • जनहित से जुड़ी सरकारी योजनाएं फाइलों में दम तोड़ रही हैं।

पूरी सरकार दो गुटों में बंटकर सिर्फ एक-दूसरे को नीचा दिखाने और सत्ता हथियाने में व्यस्त है, जिससे आम जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।

आलाकमान के पाले में गेंद, 2028 पर टिकी नजरें

अब पूरी नजरें कांग्रेस आलाकमान के फैसले पर टिकी हैं। क्या दिल्ली में बैठकर इस अंदरूनी कलह को शांत किया जा सकेगा या फिर कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगी? सिद्धारमैया अपनी कुर्सी बचा पाते हैं या शिवकुमार का राजतिलक होता है, यह आने वाले कुछ घंटों में साफ हो जाएगा। लेकिन एक बात तय है कि इस सत्ता संघर्ष से पार्टी की छवि को जो नुकसान पहुंचा है, उसका हिसाब जनता साल 2028 के विधानसभा चुनाव में जरूर करेगी।

Leave a Reply

Discover more from Detail News India

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading