कोलकाता की नखोदा मस्जिद में बड़ा ऐलान: बकरीद पर गाय की कुर्बानी नहीं, बकरियों का ही इस्तेमाल
कोलकाता, 18 मई 2026: पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार के सख्त रुख के बाद कोलकाता की ऐतिहासिक नखोदा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी ने मुसलमानों के लिए महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। इमाम ने साफ कहा है कि इस बार बकरीद (ईद-उल-अजहा) पर गाय की कुर्बानी न दें, केवल बकरियों या अन्य वैकल्पिक पशुओं की कुर्बानी दें।यह ऐलान शुभेंदु अधिकारी के दबदबे को एक बार फिर रेखांकित करता है। सूत्रों के मुताबिक, नई सरकार के सख्त पशु वध नियमों और सामाजिक सद्भाव पर जोर के कारण ही यह फैसला लिया गया है।
शुभेंदु सरकार का सख्त रुख काम कर गया
पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में 1950 के पशु वध नियंत्रण अधिनियम को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत बिना पशु चिकित्सक के स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र के किसी भी बड़े पशु (गाय, बैल, सांड आदि) की कुर्बानी पर रोक है। मौलाना शफीक कासमी ने इन नियमों का सम्मान करते हुए मुसलमानों से अपील की कि वे हिंदू भाइयों की भावनाओं का पूरा ध्यान रखें और बकरियों की कुर्बानी दें। इमाम का साफ संदेश:
“समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखना हमारा दायित्व है। गाय की जगह बकरी की कुर्बानी से हम अपने धर्म का पालन भी कर लेंगे और सामाजिक तनाव भी नहीं आएगा।”
इमाम ने सरकार को भी दिया सुझाव
मौलाना कासमी ने सरकार से मांग की कि अगर बुनियादी सुविधाएं (आधुनिक बूचड़खाने, पशु चिकित्सक, साफ-सुथरी व्यवस्था) उपलब्ध नहीं कराई जा सकतीं तो गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर पूरे देश में उसके वध पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
लाउडस्पीकर पर भी सख्त हिदायत
बकरीद के मौके पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर भी इमाम ने सतर्कता बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियम (1996-97) अभी भी लागू हैं और सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकृत हैं। अनुमत ध्वनि सीमा:
- शांत क्षेत्र: 40-45 डेसिबल
- आवासीय क्षेत्र: 65-70 डेसिबल
- वाणिज्यिक क्षेत्र: 70-75 डेसिबल
- औद्योगिक क्षेत्र: 75-80 डेसिबल
मस्जिद कमेटियों से अपील की गई है कि वे प्रशासन और पुलिस के साथ पूरा सहयोग करें।
