26/11 मुंबई आतंकी हमले के दौरान अजमल कसाब के खिलाफ पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को अब केतन अग्रवाल हत्याकांड में महाराष्ट्र सरकार ने विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) नियुक्त किया है। यह फैसला तब लिया गया जब केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराने और निकम को सरकारी वकील नियुक्त करने की मांग की। सरकार ने दोनों मांगों को मंजूरी दे दी।
क्या है केतन अग्रवाल हत्याकांड?
22 वर्षीय केतन अग्रवाल की 18 जून को पुणे के लोहागढ़ किले से गिरने के बाद मौत हो गई थी। शुरुआत में इसे हादसा माना गया, लेकिन पुलिस जांच में मामला संदिग्ध हत्या का निकला। पुलिस ने केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि दोनों ने मिलकर केतन की हत्या की साजिश रची। हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और अंतिम सच्चाई अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों के आधार पर तय होगी।
‘पूरे देश को झकझोर देने वाला मामला’
उज्ज्वल निकम ने जिम्मेदारी स्वीकार करने के बाद कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और पीड़ित परिवार के अनुरोध पर उन्होंने यह केस लड़ने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि यह हत्या पूरे देश को झकझोर देने वाली घटना है। निकम ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस की चार्जशीट दाखिल होने के बाद ही जांच से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। उनका कहना है कि महाराष्ट्र में कानून का राज कायम रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
कौन हैं उज्ज्वल निकम?
उज्ज्वल निकम देश के सबसे चर्चित सरकारी वकीलों में गिने जाते हैं। उन्होंने 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट, गुलशन कुमार हत्याकांड, प्रमोद महाजन हत्याकांड और 26/11 मुंबई आतंकी हमले जैसे कई बड़े मामलों में सरकार की ओर से पैरवी की है। 2016 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। वर्ष 2024 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। बाद में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया।
‘कसाब की बिरयानी’ वाला दावा भी रहा चर्चा में
हाल ही में उज्ज्वल निकम उस समय चर्चा में आए जब उन्होंने स्वीकार किया कि 26/11 आतंकी अजमल कसाब द्वारा जेल में मटन बिरयानी मांगने वाली कहानी सच नहीं थी। निकम ने बताया कि उन्होंने यह बात जानबूझकर मीडिया के सामने कही थी ताकि अदालत में कसाब के प्रति पैदा हो रही किसी भी संभावित सहानुभूति को रोका जा सके। उनके इस खुलासे के बाद कानूनी रणनीति और मीडिया नैतिकता को लेकर नई बहस छिड़ गई।
अब आगे क्या होगा?
महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट को मंजूरी दे दी है। फिलहाल पुलिस जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में जुटी है। उज्ज्वल निकम के विशेष लोक अभियोजक बनने के बाद माना जा रहा है कि इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई पर पूरे देश की नजर रहेगी।
