शेर सिंह का ‘इस्तीफा’ या सिर्फ एक ड्रामा? जंतर-मंतर से वायरल वीडियो की पूरी कहानी
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में उत्तराखंड पुलिस के सिपाही शेर सिंह मंच पर अपना पुलिस बैज उतारते हुए नजर आए। उन्होंने दावा किया कि वह छात्रों के समर्थन में अपनी नौकरी छोड़ रहे हैं। अपने भाषण में उन्होंने उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं में हुए कथित पेपर लीक का जिक्र किया और व्यवस्था पर सवाल उठाए। कुछ ही घंटों में यह वीडियो हजारों लोगों तक पहुंच गया और कई लोगों ने इसे एक साहसी कदम बताना शुरू कर दिया।
मंच से दिया इस्तीफा, लेकिन सामने आया दूसरा सच
शेर सिंह के वायरल वीडियो के बाद उत्तराखंड पुलिस ने पूरे मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया दी। पुलिस के अनुसार, जिस समय शेर सिंह मंच से इस्तीफे की घोषणा कर रहे थे, उस समय वह सक्रिय ड्यूटी पर थे ही नहीं। विभाग ने बताया कि वह 28 जून से बिना किसी सूचना के ड्यूटी से अनुपस्थित थे। लगातार गैरहाजिर रहने के कारण 20 जुलाई को उन्हें निलंबित कर दिया गया था। ऐसे में मंच से दिया गया उनका कथित इस्तीफा कानूनी रूप से प्रभावी नहीं माना जा सकता।
पहले से चल रही थी विभागीय कार्रवाई
उत्तराखंड पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि शेर सिंह के खिलाफ पहले से विभागीय कार्रवाई चल रही थी। अधिकारियों के मुताबिक, उनके लगातार अनुपस्थित रहने और अन्य मामलों को देखते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी थी। विभाग का कहना है कि वायरल वीडियो ने ऐसा माहौल बनाया, मानो उन्होंने अचानक भावुक होकर नौकरी छोड़ दी हो, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग थी।
जमीन कब्जाने के मामले में भी हो चुकी है गिरफ्तारी
मामला केवल ड्यूटी से अनुपस्थित रहने तक सीमित नहीं था। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2025 में हरिद्वार में संगठित अपराध और जमीन कब्जाने से जुड़े एक मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने शेर सिंह को गिरफ्तार किया था। इस मामले में उन्हें जेल भी जाना पड़ा। बाद में उन्हें जमानत मिल गई, लेकिन विभागीय कार्रवाई जारी रही और उन्हें सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी।
उत्तराखंड पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) निवेदिता कुकरेती ने स्पष्ट किया कि शेर सिंह का मंच से दिया गया कथित इस्तीफा किसी वैध प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था। उन्होंने बताया कि शेर सिंह पहले से निलंबित थे और उनके खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई जारी थी। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को वास्तविक स्थिति का पूरा सच नहीं माना जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर वायरल, लेकिन तथ्य कुछ और
शेर सिंह का वीडियो लाखों लोगों तक पहुंचा और कई लोगों ने बिना आधिकारिक जानकारी देखे इसे सच मान लिया। लेकिन पुलिस के बयान के बाद यह स्पष्ट हुआ कि वायरल वीडियो की कहानी अधूरी थी। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले दावों की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित एजेंसियों के बयान से करना कितना जरूरी है।
