NIA की बड़ी कार्रवाई: आतंकी हाफिज सईद के खिलाफ ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ की मांग, BNSS की नई धारा के तहत कसा शिकंजा
आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। एनआईए ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के मामले में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के सरगना और मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद के खिलाफ ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ (आरोपी की अनुपस्थिति में मुकदमा) चलाने की मांग की है।
नए कानून BNSS की धारा 356 का इस्तेमाल
केंद्रीय जांच एजेंसी ने यह कदम भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 356 के तहत उठाया है। आपको बता दें कि देश में नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद यह पहला ऐसा मामला है, जहां किसी घोषित आतंकी के खिलाफ उसकी गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया है।
एनआईए ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में एक विशेष याचिका दायर कर गुहार लगाई है कि हाफिज सईद पाकिस्तान में छिपा हुआ है और उसका भारत आना मुमकिन नहीं लग रहा है, इसलिए मामले की गंभीरता को देखते हुए उसके खिलाफ अनुपस्थिति में ही ट्रायल शुरू किया जाए।
क्या है पहलगाम हमला मामला?
यह पूरा मामला जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकी हमले से जुड़ा है, जिसकी साजिश रचने और फंडिंग करने का मुख्य आरोपी हाफिज सईद है। एनआईए लंबे समय से इस मामले की जांच कर रही है और उसके पास सईद के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं।
‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ से क्या बदलेगा?
अब तक किसी भी बड़े मामले में आरोपी की मौजूदगी के बिना ट्रायल पूरा करना और उसे सजा सुनाना कानूनी रूप से पेचीदा होता था। लेकिन BNSS की धारा 356 जांच एजेंसियों को यह ताकत देती है कि अगर कोई आरोपी फरार है या देश से बाहर छिपा है और उसके पकड़े जाने की उम्मीद नहीं है, तो भी अदालत मामले की सुनवाई पूरी कर उसे सजा सुना सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अदालत एनआईए की इस याचिका को स्वीकार कर लेती है, तो यह पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के लिए एक बड़ा झटका होगा। इससे न सिर्फ हाफिज सईद को भारतीय कानून के तहत सजा सुनाई जा सकेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान को बेनकाब करने में भी मदद मिलेगी।
