जिस राजकुमारी को गांधी जी ने कहा था ‘इडियट’, उसी ने भारत को दिया AIIMS का तोहफा

0
16916376641691569158untitled-1-1675314822

भारत के सबसे प्रतिष्ठित अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) का नाम आज दुनिया के बेहतरीन चिकित्सा संस्थानों में लिया जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस संस्थान की स्थापना के पीछे जिस महिला का सबसे बड़ा योगदान था, वह किसी साधारण परिवार से नहीं, बल्कि कपूरथला की राजकुमारी थीं। उनका नाम था राजकुमारी अमृत कौर। उन्होंने राजसी वैभव छोड़कर देश की आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया और स्वतंत्र भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री बनकर ऐसी नींव रखी, जिसका लाभ आज करोड़ों भारतीयों को मिल रहा है।

राजमहल छोड़कर चुना आजादी का रास्ता

राजकुमारी अमृत कौर का जन्म 2 फरवरी 1889 को उत्तर प्रदेश के लखनऊ में हुआ था। वह पंजाब की कपूरथला रियासत के शाही परिवार से थीं। उनकी शुरुआती शिक्षा इंग्लैंड में हुई और उनके सामने ऐशो-आराम से भरा जीवन था। लेकिन महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने देश सेवा का रास्ता चुना। कहा जाता है कि गांधी जी के साथ काम करने की इच्छा जताने के लिए अमृत कौर ने उन्हें लगातार कई वर्षों तक पत्र लिखे। गांधी जी ने उनकी दृढ़ता और संकल्प की परीक्षा लेने के लिए शुरुआती पत्राचार में उन्हें “Idiot” (इडियट) कहकर संबोधित किया। लेकिन अमृत कौर ने इसे अपमान नहीं, बल्कि अपने धैर्य की परीक्षा माना और पीछे नहीं हटीं। बाद में वे गांधी जी की सबसे विश्वसनीय सहयोगियों में शामिल हो गईं और लगभग 16 वर्षों तक उनकी निजी सचिव के रूप में भी कार्य किया।

भारत छोड़ो आंदोलन में खाईं लाठियां, गईं जेल

राजकुमारी अमृत कौर केवल विचारों से ही नहीं, बल्कि मैदान में उतरकर भी स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा बनीं। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ खुलकर प्रदर्शन किया। शिमला में आंदोलन के दौरान उन पर लाठीचार्ज हुआ और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। उन्होंने जीवनभर विवाह न करने का निर्णय लिया और अपना पूरा जीवन समाज सेवा, महिला अधिकारों और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित कर दिया।

आजाद भारत की पहली स्वास्थ्य मंत्री बनीं

15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ और पंडित जवाहरलाल नेहरू की पहली कैबिनेट में राजकुमारी अमृत कौर को देश की पहली स्वास्थ्य मंत्री बनाया गया। यह जिम्मेदारी आसान नहीं थी, क्योंकि उस समय भारत में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की भारी कमी थी। उन्होंने सपना देखा कि भारत में भी एक ऐसा चिकित्सा संस्थान बने, जहां गरीब और अमीर सभी को विश्वस्तरीय इलाज मिल सके और डॉक्टरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा मिले।

कैसे अस्तित्व में आया AIIMS?

AIIMS की स्थापना का विचार आसान नहीं था। संसाधनों की कमी, आर्थिक चुनौतियां और राजनीतिक अड़चनें लगातार सामने आ रही थीं। लेकिन राजकुमारी अमृत कौर ने हार नहीं मानी। उन्होंने न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, स्वीडन, पश्चिम जर्मनी और अमेरिका जैसे देशों से आर्थिक और तकनीकी सहयोग जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके अथक प्रयासों का ही परिणाम था कि 1956 में नई दिल्ली में AIIMS की स्थापना हुई। आज यह संस्थान केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में उत्कृष्ट चिकित्सा, शोध और चिकित्सा शिक्षा का प्रतीक माना जाता है।

एक ऐसी विरासत, जिसने करोड़ों लोगों की जिंदगी बदली

राजकुमारी अमृत कौर केवल AIIMS की संस्थापक शक्ति ही नहीं थीं, बल्कि उन्होंने भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी, ट्यूबरकुलोसिस नियंत्रण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और महिला शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी ऐतिहासिक योगदान दिया। उनके प्रयासों ने भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा दी। आज जब AIIMS लाखों मरीजों का इलाज करता है और देश के सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर तैयार करता है, तब यह याद रखना जरूरी है कि इसकी नींव एक ऐसी राजकुमारी ने रखी थी, जिसने राजसी जीवन छोड़कर राष्ट्र सेवा को अपना धर्म बना लिया। राजकुमारी अमृत कौर की कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची महानता जन्म से नहीं, बल्कि समाज के लिए किए गए कार्यों से तय होती है।

Leave a Reply

What’s next

Discover more from Detail News India

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading