कुरुक्षेत्र में पुजारी पर हमले के बाद एक्शन में सरकार: हरियाणा में चला ‘योगी मॉडल’, अवैध दरगाह और आरोपी का घर जमींदोज

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कुरुक्षेत्र: हरियाणा के कुरुक्षेत्र में एक मंदिर के बुजुर्ग पुजारी पर बर्बर हमले के बाद सूबे की कानून-व्यवस्था पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रही है। अढ़ोनी गांव में हुई इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद प्रशासन ने बेहद सख्त कदम उठाए हैं। उत्तर प्रदेश के चर्चित ‘योगी मॉडल’ की तर्ज पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी के अवैध निर्माणों और उस अवैध दरगाह को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है, जिसके रसूख के दम पर इस वारदात को अंजाम देने का आरोप है।

74 वर्षीय बुजुर्ग पुजारी पर जानलेवा हमला, अस्पताल में जिंदगी की जंग

यह पूरा मामला कुरुक्षेत्र के अढ़ोनी गांव का है, जहां शिव मंदिर के 74 वर्षीय पुजारी योगीराज गिरी पर जानलेवा हमला किया गया। आरोप है कि एक दरगाह से जुड़े कट्टरपंथी मानसिकता के व्यक्ति ने बुजुर्ग पुजारी को बेरहमी से घसीट-घसीटकर पीटा। इस बर्बरता के कारण पुजारी का पैर टूट गया और उनके पूरे शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं।

फिलहाल, पीड़ित पुजारी की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है और वे कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी (LNJP) अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। इस पूरी हैवानियत का एक सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोगों में भारी आक्रोश है।

हरियाणा में गरजा पीला पंजा: अवैध दरगाह और आरोपी का घर जमींदोज

पुजारी पर हुए इस कायरतापूर्ण हमले के बाद स्थानीय प्रशासन ने बिना वक्त गंवाए कड़ी कार्रवाई की। हरियाणा सरकार के निर्देश पर पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने त्वरित एक्शन लेते हुए उस अवैध दरगाह को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया, जिससे आरोपी का संबंध बताया जा रहा था। इसके साथ ही, आरोपी के घर के अवैध हिस्सों पर भी सरकार का बुलडोजर गरजा और उसे जमींदोज कर दिया गया।

प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई को राज्य में अपराधियों और दंगाइयों को एक सीधा और कड़ा अल्टीमेटम माना जा रहा है।

‘बुलडोजर मॉडल’ पर देशव्यापी बहस तेज

उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ ‘बुलडोजर मॉडल’ अब अपराधियों के खिलाफ सबसे अचूक हथियार बनता जा रहा है। मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के बाद अब हरियाणा में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि जब असामाजिक तत्वों और कानून को चुनौती देने वालों पर से कानून का खौफ खत्म होने लगता है, तो इस तरह की त्वरित कार्रवाई ही सबसे सटीक इलाज साबित होती है।

भले ही मानवाधिकारों और कथित सेक्युलरिस्म की दुहाई देने वाले इस तरह के एक्शन पर सवाल उठाते रहे हों, लेकिन संतों, पुजारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले राष्ट्रवादियों के बीच इस सख्त कदम की पुरजोर मांग की जा रही है। इस कार्रवाई ने यह साफ संदेश दे दिया है कि भविष्य में कोई भी कानून को अपने हाथ में लेने या धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की हिम्मत न कर सके।

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