क्या राहुल गांधी फिर डीएमके के साथ जाएंगे? तमिलनाडु की सियासत में तेज हुई नई अटकलें

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तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं कि कांग्रेस और डीएमके के बीच फिर से नजदीकियां बढ़ सकती हैं। यदि ऐसा होता है, तो इसका असर तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और टीवीके (TVK) के साथ कांग्रेस के रिश्तों पर भी पड़ सकता है।

मानसून सत्र से पहले बदला सियासी माहौल

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 14 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। इसी बीच विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच संभावित सहयोग और नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में संख्याबल को लेकर सभी दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं।

क्यों अहम है डीएमके का समर्थन?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डीएमके के पास लोकसभा में 22 और राज्यसभा में 8 सांसद हैं। संसद में यह संख्या किसी भी बड़े राजनीतिक समीकरण के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

इसी वजह से यह चर्चा है कि विपक्षी दल और सत्तापक्ष दोनों डीएमके के रुख पर नजर बनाए हुए हैं।

राहुल गांधी के बयान से बढ़ी अटकलें

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस डीएमके के साथ सहयोग बनाए रखने की इच्छुक है। हाल ही में इंडिया गठबंधन की एक बैठक में डीएमके शामिल नहीं हुई थी, लेकिन उसके बाद राहुल गांधी ने कहा था कि वे डीएमके और एम.के. स्टालिन के साथ मिलकर संविधान, संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए काम करना चाहते हैं।

राहुल गांधी ने कहा था कि कांग्रेस इन मुद्दों पर डीएमके के साथ साझा संकल्प को आगे बढ़ाना चाहती है।

कांग्रेस नेताओं ने भी दिए संकेत

कांग्रेस अध्यक्ष के करीबी और कर्नाटक से राज्यसभा सांसद नासिर हुसैन ने भी कहा था कि कांग्रेस उन सभी राजनीतिक दलों के साथ काम करने को तैयार है जो बीजेपी और आरएसएस के खिलाफ उनकी लड़ाई में साथ आना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा, संघीय ढांचे को मजबूत करने और देश की विविधता को बनाए रखने के लिए जो भी दल सहयोग करेगा, कांग्रेस उसके साथ काम करने के लिए तैयार है।

टीवीके और डीएमके के बीच जारी है राजनीतिक टकराव

तमिलनाडु में टीवीके और डीएमके के बीच लगातार राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल रही है। दोनों दल एक-दूसरे पर लगातार आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं और राज्य में खुद को बेहतर राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में दोनों दलों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।

फिलहाल कांग्रेस और डीएमके के बीच किसी नए राजनीतिक गठबंधन या औपचारिक समझौते की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, दोनों दलों के नेताओं के हालिया बयानों के बाद राजनीतिक अटकलों का दौर तेज हो गया है।

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