दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश के राष्ट्रपति बोले- “मेरे DNA में भारतीय मूल”, फिर भी भारत में अपनी ही सभ्यता से क्यों परेशानी?
दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश… उसका राष्ट्रपति… और मंच से दिया गया एक ऐसा बयान, जिसने सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने कहा कि उन्होंने अपना DNA टेस्ट कराया और उसमें भारतीय मूल (Indian DNA) निकला। इतना ही नहीं, उन्होंने मुस्कुराते हुए यह भी कहा कि उन्हें भारतीय गाने बेहद पसंद हैं, वे उन पर गाते भी हैं और नाचते भी हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दिया गया यह बयान इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह सिर्फ एक व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं थी, बल्कि भारत और इंडोनेशिया के हजारों साल पुराने सांस्कृतिक रिश्तों की याद भी दिला गया।
दरअसल, भारत और इंडोनेशिया का रिश्ता सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंध हजारों साल पुराने माने जाते हैं। इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है, लेकिन वहां आज भी रामायण और महाभारत की परंपरा जीवित है। बाली से लेकर जावा तक भारतीय सभ्यता की छाप साफ दिखाई देती है।
इसी ऐतिहासिक जुड़ाव का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने कहा कि उनके DNA टेस्ट में भारतीय मूल का संबंध सामने आया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें भारतीय संस्कृति बेहद पसंद है और भारतीय गीतों पर गाना और नृत्य करना उन्हें अच्छा लगता है।
इसी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया के प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर का भी दौरा किया। एक हजार साल से अधिक पुराना यह मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और दक्षिण-पूर्व एशिया में हिंदू सभ्यता की सबसे महत्वपूर्ण विरासतों में गिना जाता है।
अब सवाल यह है कि इस पूरी घटना में नया क्या है?
नया यह है कि दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश का राष्ट्रपति खुले मंच से कहता है कि उसका DNA भारतीय मूल से जुड़ा है और उसे भारतीय संस्कृति पर गर्व जैसा अपनापन महसूस होता है। लेकिन दूसरी तरफ भारत में ही एक ऐसा वर्ग मौजूद है, जो हर समय यह साबित करने में लगा रहता है कि भारत अपने ही लोगों के लिए सुरक्षित नहीं है। “India is not safe for minorities” जैसे नैरेटिव अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाए जाते हैं और भारत की छवि पर सवाल उठाए जाते हैं।
ऐसे बयानों को पड़ोसी देशों के मीडिया में भी बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है और फिर उसी के आधार पर भारत के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश होती है।

दिलचस्प बात यह भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक मुस्लिम बहुल देश में जाकर वहां स्थित प्राचीन हिंदू मंदिर का दौरा करते हैं, जबकि भारत में ही कुछ वर्ष पहले “Why the Sanatana Dharma Must Be Opposed” जैसे लेख प्रकाशित किए जाते हैं और सनातन पर राजनीतिक बहस छेड़ी जाती है।
भारतीय सभ्यता को लेकर दुनिया के अलग-अलग देशों में सम्मान दिखाई देता है, लेकिन भारत के भीतर ही कई बार इस बात पर बहस शुरू हो जाती है कि “India” लिखा जाए या “भारत”।
यही भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता भी है। यहां हर व्यक्ति को अपनी बात कहने की स्वतंत्रता है। शायद यही वजह है कि भारत में रहकर भारत के खिलाफ बोलना भी संभव है।
