रस्सी जल गई पर ऐंठन नहीं गई! सत्ता गंवाने के बाद बौखलाईं ममता बनर्जी, सरेआम शख्स को जड़ा थप्पड़; वायरल वीडियो से मचा हड़कंप
“रस्सी जल गई… लेकिन ऐंठन नहीं गई।” यह पुरानी कहावत इस वक्त पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बिल्कुल सटीक बैठती है। बंगाल की सत्ता हाथ से निकल चुकी है, मुख्यमंत्री की कुर्सी छिन चुकी है, लेकिन ‘दीदी’ का अहंकार आज भी जस का तस बना हुआ है। लोकतांत्रिक चुनावों में हार के बाद जहां बड़े-बड़े राजनेता आत्ममंथन की राह चुनते हैं, वहीं ममता बनर्जी के तेवर ढीले होने का नाम नहीं ले रहे हैं। पश्चिम बंगाल की नई शुभेंदु सरकार के ताबड़तोड़ एक्शन से दीदी इस कदर बौखलाई हुई हैं कि अब वह सरेआम लोगों पर हाथ उठाने लगी हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अपनी करारी हार का गुस्सा वह अब आम लोगों और कार्यकर्ताओं पर निकाल रही हैं।
कालीघाट का वो वायरल वीडियो
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा एक वीडियो इस बात की गवाही दे रहा है कि ममता बनर्जी अपनी हार से किस कदर भड़की हुई हैं। दरअसल, यह पूरा मामला बंगाल के बरुईपुर में हुए एक दर्दनाक रेप-मर्डर केस के खिलाफ निकाली गई रैली का था। इस रैली में कानून-व्यवस्था की दुहाई देने खुद ममता बनर्जी शामिल हुई थीं, लेकिन वहां जबरदस्त बवाल मच गया। टीएमसी (TMC) के ही कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए और देखते ही देखते लाठी-डंडे चलने लगे। हालात इतने बेकाबू हो गए कि पुलिस को बीच-बचाव करके जैसे-तैसे स्थिति को संभालना पड़ा। इसी हंगामे के बीच ममता बनर्जी का एक वीडियो सामने आया है, जिसने हर किसी को सन्न कर दिया है। वायरल वीडियो में ममता बनर्जी टीएमसी के ही एक शख्स को सरेआम थप्पड़ मारती नजर आ रही हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो कालीघाट में ममता बनर्जी के घर के ठीक सामने का है।
याद आया ममता राज का ‘तानाशाही मॉडल’
इस घटना के बाद अब बंगाल की जनता के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि जब सत्ता से बेदखल होने और पावर छिन जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री का यह रवैया है, तो उनके मुख्यमंत्री रहते हुए बंगाल का क्या हाल रहा होगा? आज लोग ममता बनर्जी के शासनकाल की उस तानाशाही को याद कर रहे हैं, जहां आम जनता की आवाज को बेरहमी से दबा दिया जाता था।
जब ममता बनर्जी सत्ता के शीर्ष पर थीं, तो वह जमीनी हकीकत से कोसों दूर वीआईपी (VIP) कल्चर में जीती थीं। जनता त्राहि-त्राहि करती थी और उनके पीछे उनकी पार्टी के गुंडे, उनके सिंडिकेट के सिपहसालार और टीएमसी के कार्यकर्ता बंगाल की सड़कों पर अपनी मर्जी चलाते थे। वसूली, हिंसा, आगजनी और राजनीतिक विरोधियों की आवाज को कुचल देना ही ममता बनर्जी का असली ‘बंगाली मॉडल’ बन चुका था। आज जब सत्ता हाथ से चली गई है, तो वह वीआईपी सिक्योरिटी और पुराना रसूख गायब हो चुका है। इसी बात का सदमा शायद ममता बनर्जी बर्दाश्त नहीं कर पा रही हैं और अपनी नाकामी का गुस्सा उन लोगों पर निकाल रही हैं जो कभी उनके इशारों पर नाचते थे।
शुभेंदु सरकार के फैसले और तुष्टिकरण पर करारी चोट
ममता बनर्जी की इस अप्रत्याशित बौखलाहट की वजह सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि उससे कहीं बड़ी है। सच तो यह है कि बंगाल में मिली शर्मनाक हार के बाद दीदी राजनीतिक और मानसिक रूप से पूरी तरह विचलित दिख रही हैं। राज्य के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के एक के बाद एक ताबड़तोड़ फैसलों ने ममता बनर्जी की नींद उड़ा दी है। शुभेंदु सरकार ने सत्ता में आते ही ममता बनर्जी के उस कोर-एजेंडे पर सीधी चोट की है, जिसके दम पर उन्होंने सालों तक बंगाल पर एकछत्र राज किया था। नई सरकार ने बंगाल के सभी सरकारी स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही, सीमा पार से होने वाली अवैध घुसपैठ पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। यही घुसपैठिए कभी टीएमसी का सबसे मजबूत और बड़ा वोट बैंक हुआ करते थे। अब सीमा पर कड़ाई होने से तुष्टिकरण की राजनीति के ताबूत में शुभेंदु सरकार ने एक-एक करके ऐसी कीलें ठोक दी हैं कि ममता बनर्जी का पूरा सियासी साम्राज्य जमींदोज हो गया है।
ताश के पत्तों की तरह ढह गई टीएमसी (TMC)
रही-सही कसर ममता बनर्जी की अपनी पार्टी ने पूरी कर दी है। जो टीएमसी कभी बंगाल में अजेय मानी जाती थी, आज वह ताश के पत्तों की तरह ढहती दिख रही है। ममता बनर्जी का किला अंदर से पूरी तरह दरक चुका है और पार्टी के भीतर एक भीषण गृहयुद्ध छिड़ा हुआ है। टीएमसी आज कई गुटों में टूट चुकी है। एक तरफ जहां बागी विधायकों ने अपना एक अलग गुट बनाकर दीदी को ठेंगा दिखा दिया है, वहीं दूसरी तरफ करीब 20 लोकसभा सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर एनसीपीआई (NCPI) का दामन थाम लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अब भारतीय राजनीति में पूरी तरह से अलग-थलग पड़ चुकी हैं। अब उनके पास न तो कोई नीति बची है और न ही कोई चुनावी रणनीति। बचा है तो सिर्फ एक हिंसक रवैया, जिसके दम पर वह अब आम लोगों और अपने ही बचे-खुचे कार्यकर्ताओं पर हमले कर रही हैं।
लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन
ममता बनर्जी को यह समझना होगा कि लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन होती है। इसी जनता ने कभी आपको फर्श से अर्श पर बिठाया था, तो आपके गुंडाराज को देखकर आपको वापस फर्श पर भी पहुंचा दिया। लेकिन अहंकार का चश्मा इतनी आसानी से नहीं उतरता। आज बंगाल की जनता एक तरफ शुभेंदु सरकार के सुशासन और कामकाज को देख रही है, तो दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री की इस गुंडागर्दी और थप्पड़बाज राजनीति का लाइव तमाशा भी देख रही है।
