मोदी-शाह से ज्यादा अपनों से खतरा! ‘छोटे भाई’ तेजस्वी ने राहुल गांधी की पीठ में घोंपा छुरा, दांव पर कांग्रेस का वजूद?
देश की सियासत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी भले ही सुबह से शाम तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर हमलावर रहते हों, लेकिन हकीकत यह है कि उन्हें बाहरी दुश्मनों से ज्यादा खतरा अपने ही ‘खास’ लोगों से है। राहुल गांधी जिसे अपना ‘छोटा भाई’ बताते हैं, जिसके साथ बुलेट की सवारी कर दोस्ती की कसमें खाते हैं, आज उसी ने कांग्रेस को ऐसा तमाचा मारा है जिसकी गूंज सीधे 10 जनपथ तक सुनाई दे रही है। हम बात कर रहे हैं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव की, जिन्होंने पर्दे के पीछे से खेल कर कांग्रेस को बैकडोर से बड़ा चुनावी झटका दिया है।
दिखावे की दोस्ती, पर्दे के पीछे बदले की आग!
राजनीति का यह पुराना दस्तूर है कि जो जितना साथ दिखता है, वह उतना ही खतरनाक होता है। बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार के बाद से ही RJD और कांग्रेस के रिश्ते सहज नहीं रहे हैं। अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि उस चुनावी शिकस्त के बाद से राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के बीच दूरियां इतनी बढ़ चुकी हैं कि दोनों एक-दूसरे का सामना करना भी पसंद नहीं करते। भले ही कैमरों के सामने दोनों पार्टियां हाथ में हाथ डालकर एकजुटता का नाटक करती हों, लेकिन पर्दे के पीछे एक-दूसरे की राजनीतिक जमीन खिसकाने का खूनी खेल जारी है।
बांकीपुर उपचुनाव: तेजस्वी ने राहुल को दिखाया ठेंगा!
दोनों दलों के बीच जारी इस नफरत और बदले की राजनीति की सबसे ताजा मिसाल बांकीपुर का उपचुनाव है। बांकीपुर सीट पर जो हुआ, उसने बिहार कांग्रेस के आत्मसम्मान की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। तेजस्वी यादव ने कांग्रेस को बिना भरोसे में लिए, एकतरफा फैसला लेते हुए वहां से रेखा गुप्ता को RJD का उम्मीदवार घोषित कर दिया।
बांकीपुर वो पारंपरिक सीट है जिसपर कांग्रेस अपना दावा ठोक रही थी और पार्टी के नेता इसे अपना हक मान रहे थे। लेकिन तेजस्वी ने कांग्रेस की एक न सुनी और साफ कर दिया कि बिहार में सिर्फ और सिर्फ उनका ही सिक्का चलेगा। तेजस्वी का यह फैसला राहुल गांधी के लिए एक खुला चैलेंज है कि RJD अब कांग्रेस की बैसाखी के बिना अपने दम पर आगे बढ़ेगी।
झारखंड से लेकर बंगाल तक ‘इंडी’ में बिखराव
यह पहला मौका नहीं है जब सहयोगियों ने कांग्रेस को दगा दिया हो। इससे पहले झारखंड में भी ऐसा ही खेल देखने को मिला था, जहां आरोप लगे थे कि RJD के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर कांग्रेस के राज्यसभा उम्मीदवार को हरवा दिया था। कहने को तो यह ‘इंडी’ (INDI) गठबंधन है, लेकिन इस खींचतान को देखकर यह कहीं से भी ‘बंधन’ नजर नहीं आता।
- पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी पहले ही राहुल गांधी को उनकी राजनीतिक हैसियत याद दिलाते हुए कह चुकी हैं कि कांग्रेस अकेले दो सीटें भी नहीं जीत सकती।
- बिहार: तेजस्वी यादव लगातार कांग्रेस को दरकिनार कर अपनी मर्जी से टिकट बांट रहे हैं।
- उत्तर प्रदेश: अब सबसे बड़ा डर यूपी को लेकर है, जहां कांग्रेस नेताओं के बीच भारी असमंजस है। कांग्रेस खेमे में खौफ है कि कहीं अखिलेश यादव भी तेजस्वी की राह पर चलते हुए कांग्रेस के साथ कोई नया खेल न कर दें।
राहुल गांधी के नेतृत्व पर बड़ा सवालिया निशान
इस पूरे घटनाक्रम ने राहुल गांधी की लीडरशिप कैपेबिलिटी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या विपक्ष का कोई भी क्षत्रप राहुल गांधी को अपना नेता मानने को तैयार है? ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव और अखिलेश यादव के तेवरों से साफ है कि कोई भी राहुल के पीछे चलने को राजी नहीं है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर विपक्ष ही उनके नेतृत्व को स्वीकार नहीं कर पा रहा है, तो कांग्रेस को जल्द ही किसी दूसरे विकल्प पर विचार करना होगा। अगर समय रहते पार्टी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो देश की यह सबसे पुरानी पार्टी सिर्फ इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह जाएगी।
