13 साल से बिना किराया सरकारी बंगले पर कब्जा? RTI में कांग्रेस के 24 अकबर रोड को लेकर बड़ा खुलासा
13 साल… बिना किराया… और फिर भी सरकारी बंगले पर कब्जा!
आखिर ऐसा कैसे हो सकता है? क्या देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के लिए नियम अलग हैं? या फिर इस कहानी में कुछ ऐसा है, जो अब तक आम लोगों की नजरों से दूर था?
अगर आपसे पूछा जाए कि दिल्ली का सबसे चर्चित पता कौन-सा है, तो शायद आपके दिमाग में किसी उद्योगपति या फिल्म स्टार का घर आए। लेकिन देश की राजनीति में दो ऐसे पते हैं, जिनका इतिहास सत्ता के सबसे बड़े केंद्रों से जुड़ा रहा है—10 जनपथ और 24 अकबर रोड।
10 जनपथ, जहां लंबे समय तक सोनिया गांधी रहीं, और 24 अकबर रोड, जो दशकों तक कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय मुख्यालय रहा। अब इन्हीं दोनों पतों को लेकर RTI में ऐसे खुलासे हुए हैं, जिन्होंने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
मामला 24 अकबर रोड का है। कांग्रेस अब अपना नया मुख्यालय कोटला रोड स्थित इंदिरा भवन में शिफ्ट कर चुकी है। लेकिन सवाल यह है कि पुराने मुख्यालय का क्या हुआ?
RTI के जरिए सामने आई जानकारी के मुताबिक, 24 अकबर रोड का आवंटन 26 जून 2013 को ही रद्द कर दिया गया था। इसके बावजूद कांग्रेस ने परिसर खाली नहीं किया और तब से इस सरकारी संपत्ति का किराया भी जमा नहीं किया गया।
यहीं से कहानी और दिलचस्प हो जाती है।
केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के अधीन डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट्स की ओर से दिए गए RTI जवाब में बताया गया कि लुटियंस दिल्ली स्थित बंगला नंबर 24, अकबर रोड, 7 अगस्त 1992 को कांग्रेस पार्टी को आवंटित किया गया था। हालांकि 26 जून 2013 से यह आवंटन समाप्त हो गया और उसके बाद से परिसर कथित तौर पर बिना अधिकृत अनुमति के कब्जे में बना हुआ है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है।
अगर कोई आम नागरिक किराया न दे तो मकान मालिक कुछ ही दिनों में नोटिस भेज देता है, कानूनी कार्रवाई शुरू हो जाती है और मकान खाली कराने का दबाव बन जाता है। लेकिन यहां देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी का मामला है। आवंटन रद्द हो गया, नया मुख्यालय भी बन गया, लेकिन पुराना सरकारी परिसर वर्षों तक खाली नहीं किया गया।
दिलचस्प बात यह भी है कि कुछ ही दिन पहले राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसी 24 अकबर रोड स्थित परिसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और कहा था कि “24 अकबर रोड अभी भी 24 अकबर रोड ही है।”
और यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस से जुड़े सरकारी आवासों को लेकर सवाल उठे हों।
साल 2022 में दायर एक RTI में 10 जनपथ को लेकर भी जानकारी सामने आई थी। यही वह सरकारी आवास है, जिसे लंबे समय तक कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र माना जाता रहा। उसी RTI के मुताबिक 24 अकबर रोड पर ₹12,69,902 का किराया बकाया बताया गया था, जबकि 10 जनपथ पर ₹4,610 का किराया बकाया दर्ज था।
अब नया सवाल यह है कि 2013 से अब तक 24 अकबर रोड का कुल बकाया कितना बनता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसका आकलन किया जा रहा है।
फिलहाल RTI के इस खुलासे ने एक बार फिर सरकारी संपत्तियों के उपयोग, राजनीतिक दलों की जवाबदेही और सार्वजनिक संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
