लोकतंत्र पर प्रहार या तुष्टिकरण का चरम? कर्नाटक में मस्जिदों के भीतर रची जा रही वोटर लिस्ट तय करने की साजिश, NDA का चुनाव आयोग में बड़ा धावा!

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भारत के लोकतंत्र को एक खास एजेंडे के तहत हाईजैक किया जा रहा है। कर्नाटक से आई एक बेहद चौंकाने वाली खबर ने इस समय पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। आरोप लग रहे हैं कि कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के राज में तुष्टिकरण और धांधली की सारी हदें पार हो चुकी हैं। अब सरकारी दफ्तरों या जनता के दरवाजों की जगह सीधे मस्जिदों के भीतर बैठकर देश के वोटर तय किए जा रहे हैं। जिस वोटर लिस्ट के दम पर देश की सरकारें चुनी और बदली जाती हैं, उस वोटर लिस्ट को तैयार करने का खेल अब कथित तौर पर मस्जिदों के भीतर चल रहा है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पूरे कर्नाटक में भारी राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) के बड़े नेताओं ने इस धांधली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और यह गंभीर मामला अब चुनाव आयोग के दरवाजे तक पहुंच चुका है।

मस्जिदों में जमे अधिकारी

देशभर में इस समय SIR (Special Summary Revision) यानी वोटर लिस्ट में सफाई का विशेष अभियान चल रहा है। चुनाव आयोग का नियम स्पष्ट कहता है कि नाम जोड़ने, हटाने या सुधारने के लिए सरकारी तंत्र पूरी पारदर्शिता के साथ काम करेगा। नियमों के मुताबिक, बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को अनिवार्य रूप से घर-घर जाकर फॉर्म भरना होता है। उन्हें परिवार के हर एक सदस्य की व्यक्तिगत पहचान सुनिश्चित करनी होती है, ताकि कोई भी फर्जी नाम वोटर लिस्ट में शामिल न हो सके। लेकिन कर्नाटक में इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आरोप हैं कि बीएलओ (BLO) आम जनता के घरों पर जाने की जगह कम्युनिटी हॉल और मस्जिदों के भीतर बैठकर थोक के भाव में फॉर्म भर रहे हैं।

आखिर सरकारी अधिकारियों को मस्जिदों के भीतर बिठाकर एक खास वर्ग के लोगों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल करने की ये साजिश किसके इशारे पर हो रही है? क्या कर्नाटक की सत्ता में बैठी कांग्रेस ने अधिकारियों को खुली छूट दे दी है कि वे लोकतंत्र के साथ सरेआम खिलवाड़ कर सकें?

सोची-समझी क्रोनोलॉजी

यह कोई सामान्य प्रशासनिक लापरवाही नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी और सोची-समझी क्रोनोलॉजी दिखाई दे रही है। मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर सामने आए सबूतों के मुताबिक, लोगों को मस्जिदों और कम्युनिटी हॉल्स में बुलाने के लिए बाकायदा स्पेशल व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं। इन ग्रुप्स के जरिए लोगों को लगातार मैसेज भेजे जा रहे हैं, उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है और एक तय रणनीति के तहत भारी भीड़ जुटाकर ‘मास-एनरोलमेंट’ (सामूहिक पंजीकरण) कराया जा रहा है।

दोबारा ‘डोर-टू-डोर’ वेरिफिकेशन की मांग

इस महाधांधली के सामने आते ही विपक्षी दलों ने कर्नाटक सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग छेड़ दी है। एनडीए (NDA) के एक हाई-प्रोफाइल प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुकुमार से मुलाकात की और इस पूरे मामले में एक बेहद गंभीर और औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इस डेलिगेशन में केंद्रीय मंत्रियों से लेकर कर्नाटक विधानसभा और विधान परिषद के नेता प्रतिपक्ष समेत दोनों पार्टियों के कई कद्दावर नेता मौजूद थे NDA के नेताओं ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए चुनाव अधिकारी के सामने साफ कर दिया है कि लोकतंत्र के साथ इस तरह की धांधली को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विपक्ष की मुख्य है कि इस पूरे मामले की तत्काल और निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। जितने भी फॉर्म अब तक इन संदिग्ध जगहों (मस्जिदों और कम्युनिटी हॉल्स) पर बैठकर भरे गए हैं, उन सभी फॉर्म्स का घर-घर जाकर अनिवार्य रूप से दोबारा वेरिफिकेशन (सत्यापन) कराया जाए।

घुसपैठियों को बनाया जा रहा है वोट बैंक?

इस पूरे मामले का सबसे डरावना पहलू सुरक्षा से जुड़ा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर मस्जिदों में बैठकर, गुपचुप तरीके से किसके नाम वोटर लिस्ट में जोड़े जा रहे हैं? विपक्ष का सीधा आरोप है कि कांग्रेस सरकार बड़े पैमाने पर अवैध प्रवासियों और घुसपैठियों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल करवा रही है। जो लोग इस देश के नागरिक ही नहीं हैं, जो अवैध तरीके से सीमा पार करके या गलत पहचान के साथ भारत में दाखिल हुए हैं, उन्हें कर्नाटक के भीतर एक अवैध वोट बैंक में तब्दील करने की कोशिश की जा रही है। क्या SIR के तहत ही घुसपैठिए कर्नाटक को अपना सेफ ठिकाना बनाना चाहते हैं? अगर इस बात में थोड़ी भी सच्चाई है, तो कांग्रेस पार्टी इस देश की आंतरिक सुरक्षा के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ कर रही है।

राहुल गांधी की चुप्पी पर सुलगते सवाल

आखिर में सबसे बड़ा सवाल देश के नेता विपक्ष से है। देशभर में घूम-घूमकर ‘वोट चोरी’ और ‘संविधान बचाने’ की बात करने वाले राहुल गांधी अपनी ही कांग्रेस शासित राज्य में चल रही इस खुली धांधली पर चुप क्यों हैं? जैसे ही इस धांधली में मस्जिद का एंगल सामने आया, कांग्रेस के आला नेताओं ने क्यों मुंह मोड़ लिया है? आखिर क्यों मस्जिद से सरकारी SIR का फॉर्म भरा जा रहा था? इसका जवाब कांग्रेस को देश की जनता को देना ही होगा।

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