अमित शाह की रणनीति या NRC का खौफ? ओवैसी के ‘तारीफ’ वाले बयान के क्या हैं असली सियासी मायने
अपनी तीखी बयानबाजी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) व गृह मंत्री अमित शाह की मुखर आलोचना के लिए जाने जाने वाले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बदले सुर ने देश के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। हाल ही में ओवैसी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें वे अमित शाह की कार्यशैली की प्रशंसा करते नजर आ रहे हैं। ओवैसी ने अपने बयान में कहा, “गृह मंत्री कोई कच्चा काम नहीं करते, वे हवा में गोली नहीं चलाते।”
इस बयान के सामने आने के बाद राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह बहस छिड़ गई है कि क्या ओवैसी सचमुच शाह की कार्यशैली के मुरीद हो गए हैं या फिर इसके पीछे कोई गहरा सियासी डर और आगामी बड़े बदलावों का पूर्वाभास है?
इशारों-इशारों में देशव्यापी NRC का अंदेशा
वायरल वीडियो में ओवैसी ने सीधे तौर पर देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू होने की ओर इशारा किया है। उन्होंने दावा किया कि अमित शाह ने एक विशेष आयोग (कमीशन) का गठन किया है। ओवैसी ने आशंका जताते हुए कहा, “मैं गलत भी हो सकता हूँ, लेकिन आखिरकार इसका अंतिम नतीजा NRC हो सकता है।”
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ओवैसी के इस बयान के पीछे उस पारंपरिक वोट बैंक के खिसकने की चिंता है, जिसके दम पर हैदराबाद से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में उनकी राजनीति चलती है। जब ओवैसी यह स्वीकार करते हैं कि “शाह हवा में तीर नहीं चलाते”, तो इसका सीधा मतलब है कि विपक्ष को भी अब यह अहसास हो चुका है कि सरकार इस बार केवल कागजी खानापूर्ति नहीं करेगी, बल्कि देश के भीतर अवैध रूप से रह रहे नागरिकों की पहचान के लिए ठोस और निर्णायक कदम उठाने जा रही है।
अमित शाह की ‘साइलेंट’ कार्यशैली और मास्टरप्लान
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भारतीय राजनीति में एक बेहद सटीक और अचूक रणनीतिकार माना जाता है। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटाने से लेकर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लागू करने तक, शाह का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है कि वे बिना किसी शोर-शराबे के अपनी प्रशासनिक बिसात बिछाते हैं। जब तक विपक्ष उनकी रणनीति को समझ पाता है, तब तक सरकार अपना मास्टरप्लान जमीन पर लागू कर चुकी होती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि CAA को लागू करना महज एक शुरुआत थी और सरकार का अगला बड़ा एजेंडा NRC हो सकता है।
वोट बैंक की चिंता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा
सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्री द्वारा गठित नए तंत्र के तहत देश में सिस्टेमैटिक तरीके से अवैध घुसपैठ के खिलाफ एक व्यापक अभियान की तैयारी चल रही है। ओवैसी समेत कई विपक्षी नेताओं में मची इस खलबली को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले दलों को डर है कि यदि देश में एनआरसी पूरी तरह लागू हो गया, तो अवैध घुसपैठ के सहारे फल-फूल रही उनकी सियासत को ऐसा जोरदार झटका लगेगा जिससे उबर पाना मुश्किल होगा।
देश के लिए क्यों जरूरी माना जा रहा है NRC?
इस समय देश के विभिन्न हिस्सों में लाखों की संख्या में अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के मौजूद होने के दावे किए जाते रहे हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, ये घुसपैठिए देश के सीमित संसाधनों जैसे रोजगार, मुफ्त राशन, स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पर भारी बोझ बन रहे हैं। इसके साथ ही, देश के कई सीमावर्ती और आंतरिक जिलों में तेजी से हो रहा जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Change) कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रही है। यदि इस पर समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह इस खतरे की संवेदनशीलता को बखूबी समझते हैं। यही वजह है कि बिना किसी हो-हल्ले के सरकार ने अपनी अंदरूनी प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली हैं, जिसका अंदेशा खुद ओवैसी अपने बयान में जता रहे हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार आने वाले समय में किस फुलप्रूफ रणनीति के तहत देशव्यापी एनआरसी को अमलीजामा पहनाती है।
