जंतर-मंतर को बनाया एंटरटेनमेंट का अड्डा! अन्ना हजारे पर विवादित बयान देकर घिरे CJP के अभिजीत दिपके, सोशल मीडिया पर खिंचाई
दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर, जो कभी देश के बड़े-बड़े और ऐतिहासिक आंदोलनों का गवाह हुआ करता था, आज वो कुछ तथाकथित एक्टिविस्टों की वजह से सिर्फ राजनीति और पब्लिसिटी स्टंट का अड्डा बनता जा रहा है। आंदोलन के नाम पर अपनी राजनीतिक दुकान चलाने वाले कुछ चेहरे अब इस कदर मर्यादा भूल चुके हैं कि उन्हें न तो देश के आइकन्स की परवाह है और न ही बुजुर्गों के सम्मान की। खुद को बड़ा आंदोलनकारी बताने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके अपने एक विवादित बयान को लेकर चौतरफा घिर गए हैं। दिपके ने देश के दिग्गज सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को लेकर एक बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी जमकर क्लास लगाई जा रही है।
छत्रपति संभाजीनगर में दिया विवादित बयान
पिछले 18 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ड्रामा करने वाले तथाकथित एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके हाल ही में महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे थे। वहां वे कथित पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के एक प्रदर्शन में शामिल हुए। इस दौरान जब पत्रकारों ने उनसे सीधा सवाल पूछा, तो उनके भीतर का अहंकार और असली नीयत सामने आ गई।
जब संवाददाताओं ने दिपके से पूछा कि क्या वह महाराष्ट्र दौरे के दौरान वरिष्ठ आंदोलनकारी अन्ना हजारे से मुलाकात करेंगे? इस पर दिपके ने बेहद तल्ख और घमंडी लहजे में कहा कि बिल्कुल नहीं। मुझे लगता है कि युवाओं को अब कमान अपने हाथ में ले लेनी चाहिए। जो लोग 60-70 साल के हो गए हैं, उन्हें अब रिटायर हो जाना चाहिए। चाहे राजनीति हो या एक्टिविज्म, वे रिटायर होकर सीधे आश्रम में बैठें।
“बिल्कुल नहीं। मुझे लगता है कि युवाओं को अब कमान अपने हाथ में ले लेनी चाहिए। जो लोग 60-70 साल के हो गए हैं, उन्हें अब रिटायर हो जाना चाहिए। चाहे राजनीति हो या एक्टिविज्म, वे रिटायर होकर सीधे आश्रम में बैठें।”
– अभिजीत दिपके, संस्थापक, CJP
सोशल मीडिया पर फूटा जनता का गुस्सा
अभिजीत दिपके का यह बयान सोशल मीडिया पर आते ही वायरल हो गया और लोग उनके इस दोहरे चरित्र (Hypocrisy) पर तीखे सवाल उठा रहे हैं। यूजर्स का कहना है कि एक तरफ दिपके 60 साल के बुजुर्गों को आश्रम भेजने की वकालत कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ खुद की राजनीति चमकाने के लिए 59-60 साल के सोनम वांगचुक के अनशन के पीछे छिप रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग कमेंट कर कह रहे हैं कि यह इन तथाकथित एक्टिविस्टों का पुराना पैटर्न है कि खुद आराम से खाओ-पियो, पब्लिसिटी के लिए लड़ाई बुजुर्गों से लड़वाओ और काम निकल जाने के बाद कहो कि ‘हमें बूढ़ों की जरूरत नहीं है।’
‘अन्ना आंदोलन’ की याद दिलाकर लोगों ने घेरा
अन्ना हजारे वो शख्सियत हैं जिनके एक इशारे पर साल 2011 में पूरा देश भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतर आया था। हालांकि, इतिहास गवाह है कि अन्ना हजारे के सीधेपन और ईमानदारी का सबसे ज्यादा फायदा उनके स्वार्थी चेलों ने उठाया, जिन्होंने आंदोलन की आड़ में ‘आम आदमी पार्टी’ बनाई और दिल्ली की सत्ता पर काबिज हो गए। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा ठगे खुद अन्ना हजारे ही गए थे।
2026 का नया भारत है
आरोप लग रहे हैं कि अभिजीत दिपके भी ठीक उसी पुरानी और घिसी-पिटी स्क्रिप्ट को दोबारा दोहराकर युवाओं को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। छात्रों के असली मुद्दों से दूर, इनका मकसद सिर्फ और सिर्फ अपनी पब्लिसिटी और राजनीति चमकाना है। लेकिन दिपके को यह समझना होगा कि यह 2011 नहीं, बल्कि 2026 का नया भारत है, जहां जनता इन प्रोपेगैंडा और नौटंकियों को अच्छी तरह समझती है। इस विवादित टिप्पणी ने CJP और दिपके के हिडन एजेंडे को पूरी तरह एक्सपोज कर दिया है।
