पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशियों पर कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय बहस, Financial Times की रिपोर्ट को लेकर उठा विवाद

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पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ चल रहे अभियान ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहस छेड़ दी है। भारतीय एजेंसियों की ओर से अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की कार्रवाई जारी है। इसी बीच ब्रिटिश अखबार Financial Times की एक रिपोर्ट को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।

रिपोर्ट में भारत की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इसमें अवैध घुसपैठ के मूल मुद्दे की बजाय केवल निर्वासन प्रक्रिया पर जोर दिया गया है।

‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ अभियान जारी

भाजपा सरकार बनने के बाद पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठियों के खिलाफ अभियान तेज किया गया है। प्रशासन की ओर से “डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट” नीति के तहत अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें उनके देश वापस भेजने की कार्रवाई की जा रही है।

पिछले कुछ सप्ताहों में सीमा क्षेत्रों से कई वीडियो और रिपोर्ट सामने आई हैं, जिनमें अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को सीमा पार भेजे जाने की जानकारी दी गई है।

Financial Times की रिपोर्ट से शुरू हुआ विवाद

इसी अभियान के बीच Financial Times ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसकी हेडलाइन थी—”India expels thousands of migrants in dead of night.”

रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत रात के समय सीमा पार लोगों को वापस भेज रहा है, जिससे भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ा है। रिपोर्ट में कुछ मानवाधिकार संगठनों की चिंताओं का भी उल्लेख किया गया है, जिन्होंने पहचान और निर्वासन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि बांग्लादेश सीमा सुरक्षा बल (BGB) के जवान लाउडस्पीकर के माध्यम से भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) को लोगों को सीमा पार भेजने से रोकने की कोशिश करते हैं।

लांस कॉर्पोरल महमूद मसूद के हवाले से रिपोर्ट में लिखा गया कि भारतीय सुरक्षाकर्मी कथित तौर पर अंधेरा होने का इंतजार करते हैं और फिर लोगों को सीमा पार भेजने का प्रयास करते हैं।

मानवाधिकार संगठनों का भी हवाला

Financial Times की रिपोर्ट में Human Rights Watch की एशिया उप-निदेशक मीनाक्षी गांगुली का भी हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय अधिकारी कथित तौर पर अधिकांश मुस्लिम परिवारों को सीमा पार भेज रहे हैं या सीमा क्षेत्र में छोड़ रहे हैं।

रिपोर्ट में कुछ आलोचकों के हवाले से यह भी कहा गया कि निर्वासन अभियान भाजपा की उस राजनीति को दर्शाता है, जिसमें भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की कोशिश की जा रही है। इसी आधार पर रिपोर्ट में धार्मिक भेदभाव से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया गया।

आलोचकों ने उठाए सवाल

रिपोर्ट को लेकर कई लोगों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि रिपोर्ट में अवैध घुसपैठ के मूल मुद्दे पर अपेक्षाकृत कम चर्चा की गई, जबकि निर्वासन की प्रक्रिया और धार्मिक पहलू को अधिक महत्व दिया गया।

आलोचकों का यह भी तर्क है कि रिपोर्ट में यह सवाल नहीं उठाया गया कि जिन लोगों को भारत अवैध नागरिक बता रहा है, उन्हें बांग्लादेश तत्काल स्वीकार क्यों नहीं कर रहा है। उनका कहना है कि सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवासन जैसे मुद्दों पर भी समान रूप से चर्चा होनी चाहिए थी।

अवैध घुसपैठ पर जारी है कार्रवाई

पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठियों की पहचान और निर्वासन की कार्रवाई फिलहाल जारी है। राज्य और केंद्रीय एजेंसियां लगातार सीमा क्षेत्रों में अभियान चला रही हैं।

इस बीच Financial Times की रिपोर्ट ने इस पूरे मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। एक ओर मानवाधिकार संगठनों की ओर से प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत में कई लोग इसे सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवासन से जुड़ा आवश्यक कदम बता रहे हैं।

फिलहाल पश्चिम बंगाल में चल रहा अभियान और उस पर उठी अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं दोनों ही राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

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