जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों में ‘विवादित किताबों’ पर बवाल, 8 अधिकारी सस्पेंड, जांच शुरू
जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में रखी गई दो किताबों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इन किताबों पर आरोप है कि इनमें अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा दिया गया और आतंकवाद से जुड़े कुछ लोगों को “शहीद” और “महान व्यक्तित्व” के रूप में पेश किया गया। मामला सामने आने के बाद उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शिक्षा विभाग के 8 अधिकारियों को निलंबित कर दिया, जबकि एक संविदा कर्मचारी की सेवाएं भी समाप्त कर दी गईं। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
किन किताबों पर हुआ विवाद?
विवाद दो किताबों को लेकर है-‘Personalities and Legends of J&K’ और ‘Great Personalities of Jammu and Kashmir’। ये किताबें समग्र शिक्षा अभियान (Samagra Shiksha) के तहत सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी के लिए खरीदी गई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, इनकी 250 से अधिक प्रतियां जम्मू, उधमपुर, रामबन और बारामूला के सरकारी स्कूलों में भेजी गई थीं। विवाद सामने आने के बाद दोनों किताबों को तुरंत स्कूलों से हटाने का आदेश दिया गया।
आखिर इन किताबों में क्या लिखा था?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, किताबों में कश्मीर को कई जगह “Indian Occupied Kashmir” और “Indian Held Kashmir” जैसे शब्दों से संबोधित किया गया। इतना ही नहीं, भारत को एक “कब्जा करने वाला देश” बताने जैसे कथित उल्लेख भी सामने आए। यही नहीं, अलगाववादी नेता मकबूल भट, मसरत आलम, सैयद अली शाह गिलानी और शब्बीर शाह जैसे लोगों का उल्लेख सकारात्मक भाषा में किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई। प्रशासन का कहना है कि इस तरह की सामग्री स्कूली छात्रों के लिए उपयुक्त नहीं है।
सरकार ने क्या कार्रवाई की?
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने दोनों किताबों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। इनके लेखकों और प्रकाशकों को भी भविष्य में किसी सरकारी शैक्षणिक सामग्री की आपूर्ति से प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही यह जांच भी शुरू कर दी गई है कि आखिर ऐसी किताबें चयन प्रक्रिया से गुजरकर सरकारी स्कूलों तक कैसे पहुंचीं और इसके लिए किस स्तर पर लापरवाही हुई।
अब होगी पैसों की भी जांच
सरकार ने केवल किताबों की सामग्री ही नहीं, बल्कि पूरे खरीद प्रक्रिया की वित्तीय जांच कराने का भी फैसला लिया है। जांच में यह देखा जाएगा कि इन किताबों की खरीद पर कितना सरकारी पैसा खर्च हुआ, किसने इन्हें मंजूरी दी और क्या पहले भी इसी तरह की सामग्री सरकारी स्कूलों में भेजी गई थी। इसके अलावा समग्र शिक्षा योजना के तहत हुई पूरी खरीद प्रक्रिया की समीक्षा भी की जाएगी।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भाजपा ने इसे गंभीर सुरक्षा और शिक्षा से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं जम्मू-कश्मीर सरकार ने भी कहा है कि यदि जांच में किसी भी अधिकारी, लेखक या प्रकाशक की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच जारी है और प्रशासन पूरे मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है।
