मोदी सरकार का चला ब्रह्मास्त्र, लश्कर-जैश से जुड़े 23 को आतंकवादी घोषित किया
आतंकवाद के खिलाफ मोदी सरकार ने एक बार फिर ऐसा कदम उठाया है जिससे पाकिस्तान और उसके पाले हुए आतंकियों के खेमे में हड़कंप मच गया है। क्या कोई सोच सकता था कि पाकिस्तान में बैठकर भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले, कश्मीर में खून बहाने वाले और हमारे पवित्र स्थलों की रेकी करने वाले दुश्मनों पर भारत घर बैठे ऐसा तगड़ा कानूनी वार करेगा? गृह मंत्रालय ने एक बहुत बड़ा एक्शन लेते हुए प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े 23 खूंखार अपराधियों को यूएपीए (UAPA) के तहत आधिकारिक तौर पर ‘आतंकी’ घोषित कर दिया है।
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को इन आतंकियों की फंडिंग रोकने, इनकी संपत्ति जब्त करने और इनके हथियारों के नेटवर्क को पूरी तरह तबाह करने की खुली छूट मिल गई है। गृह मंत्री अमित शाह ने साफ लफ्जों में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ विजन के तहत देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी आतंकी मॉड्यूल को बख्शा नहीं जाएगा।
हाफिज सईद का रिश्तेदार और राम मंदिर की रेकी का सनसनीखेज सच
इस नई लिस्ट में जो नाम सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले और खतरनाक हैं। इन्हीं में से एक नाम है मोहम्मद मुसद्दिक उर्फ डॉक्टर का, जो खूंखार आतंकी हाफिज सईद का करीबी रिश्तेदार बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों के हाथ जो इनपुट्स लगे हैं, उनके मुताबिक इस मुसद्दिक ने अयोध्या के भव्य राम मंदिर और नागपुर में आरएसएस (RSS) मुख्यालय की रेकी की थी। यह इस बात का साफ सबूत है कि पाकिस्तान में बैठे आका भारत के सबसे संवेदनशील और पवित्र स्थलों को निशाना बनाने की फिराक में थे।
इस लिस्ट में शामिल सभी 23 आतंकी जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जमात-उद-दावा (JuD) और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) जैसे खूंखार और प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े हुए हैं। सरकार के मुताबिक, ये लोग केवल योजना ही नहीं बना रहे थे, बल्कि भारत में घुसपैठ कराने, युवाओं को बरगलाकर आतंकियों की भर्ती करने, टेरर फंडिंग जुटाने और हथियारों की सप्लाई करने में सीधे तौर पर शामिल रहे हैं।
नगरोटा और सुनजवां हमलों के मास्टरमाइंड भी नपे
अब जरा इन आतंकियों के इतिहास और उनके गुनाहों के दांव-पेंच को भी समझ लेते हैं। इस लिस्ट में वो चेहरे भी शामिल हैं जिन्होंने भारतीय सेना और सुरक्षा बलों पर हुए बड़े हमलों की साजिश रची थी। इनमें से कुछ आतंकियों का कनेक्शन 2016 के नगरोटा आर्मी कैंप हमले से है, जिसमें हमारे 7 जांबाज जवान शहीद हुए थे। वहीं कुछ नाम 2022 के जम्मू के सुनजवां हमले से भी जुड़े हैं, जहां सीआईएसएफ (CISF) के जवानों की बस पर कायरतापूर्ण हमला किया गया था।
गृह मंत्रालय की इस ताजा अधिसूचना के मुताबिक, घोषित किए गए इन 23 आतंकियों में से 17 पाकिस्तानी नागरिक हैं और 6 भारतीय मूल के हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये सभी के सभी इस वक्त पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) की सुरक्षित पनाहगाहों में बैठकर भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं और वहीं से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।
2019 का वो मास्टरस्ट्रोक और आतंकवाद का अंत
आपको याद होगा कि साल 2019 में मोदी सरकार ने यूएपीए कानून में एक बड़ा ऐतिहासिक संशोधन किया था। इससे पहले सरकार केवल पूरे संगठन को आतंकी घोषित कर सकती थी, जिससे आतंकी नया नाम रखकर बच निकलते थे। लेकिन 2019 के संशोधन के बाद अब सरकार सीधे किसी भी व्यक्ति विशेष (इंडीविजुअल) को आतंकी घोषित कर सकती है। इस नए एक्शन के बाद अब भारत सरकार द्वारा यूएपीए के तहत घोषित व्यक्तिगत आतंकियों की कुल संख्या बढ़कर 80 हो गई है।
यह कार्रवाई साफ संदेश देती है कि चाहे कोई आतंकी किसी भी कोने में छिपा हो, अगर उसने भारत की संप्रभुता और नागरिकों पर आंख उठाई, तो कानून का शिकंजा उसे छोड़ नहीं सकता। लश्कर के लॉन्चिंग कमांडर फिरदौस अहमद भट से लेकर जैश के मसूद इलियास कश्मीरी और मुफ्ती मोहम्मद असगर खान तक, इन सभी दुश्मनों के नाम अब भारत की मोस्ट वांटेड आतंकी लिस्ट में दर्ज हो चुके हैं और इनका अंत अब तय माना जा रहा है।
