15 साल बाद बदला बंगाल, नई सरकार के दो महीने और बड़े बदलाव
15 वर्षों तक पश्चिम बंगाल की राजनीति पर ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस का दबदबा रहा। लेकिन 2026 के विधानसभा चुनाव में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत हासिल किया और शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ। सरकार बनते ही प्रशासन, सुरक्षा, शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कई बड़े फैसलों पर तेजी से काम शुरू कर दिया गया।
घुसपैठ पर सबसे बड़ा एक्शन
नई सरकार ने सबसे पहले अवैध घुसपैठ के मुद्दे को अपनी प्राथमिकता बनाया है। सरकार ने “Detect, Delete and Deport” नीति पर काम शुरू किया है, जिसके तहत अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान, सरकारी रिकॉर्ड से उनका नाम हटाने और कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें वापस भेजने की तैयारी की जा रही है। इसी के साथ पश्चिम बंगाल में NRC लागू करने की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। सरकार का दावा है कि इससे राज्य में अवैध घुसपैठ पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
भारत-बांग्लादेश बॉर्डर को किया जा रहा मजबूत
सीमा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारत-बांग्लादेश सीमा पर BSF फेंसिंग के लिए जमीन हस्तांतरण का काम पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज गति से किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि वर्षों से लंबित इस प्रक्रिया के पूरा होने से तस्करी, घुसपैठ और सीमा पार होने वाले अपराधों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी।
शिक्षा व्यवस्था में भी बड़े बदलाव
नई सरकार ने स्कूलों में राष्ट्रवादी मूल्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई फैसले लिए हैं। सरकारी स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके अलावा कई सरकारी संस्थानों और कार्यालयों में सरकारी प्रतीकों के स्थान पर राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ को प्रमुखता देने का काम भी तेजी से किया जा रहा है।
महिलाओं के लिए बड़ी आर्थिक योजना
महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए भाजपा सरकार ने ‘अन्नपूर्णा योजना’ शुरू करने की घोषणा की है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 3000 रुपये की आर्थिक सहायता देने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का कहना है कि इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता दोनों बढ़ेंगी।
आयुष्मान भारत अब बंगाल में
कई वर्षों से पश्चिम बंगाल में लागू न हो सकी आयुष्मान भारत योजना को अब जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस योजना के लागू होने के बाद लाखों गरीब परिवारों को सालाना स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे इलाज का खर्च काफी हद तक कम हो सकेगा।
प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव
नई सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव शुरू कर दिया है। राज्य सचिवालय को दोबारा ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग में शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। साथ ही नौकरशाही में पारदर्शिता बढ़ाने, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और निर्णय प्रक्रिया को तेज करने के लिए कई प्रशासनिक सुधार किए जा रहे हैं।
क्या सच में बदल रहा है बंगाल?
सिर्फ दो महीनों के भीतर लिए गए इन फैसलों ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि नई सरकार राज्य की कार्यशैली को पूरी तरह बदलने की कोशिश कर रही है। हालांकि इन फैसलों को लेकर राजनीतिक बहस भी जारी है। भाजपा इन्हें “नए बंगाल” की शुरुआत बता रही है, जबकि विपक्ष कई नीतियों पर सवाल उठा रहा है। अब आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये घोषणाएं जमीन पर कितना असर दिखाती हैं और क्या वास्तव में बंगाल एक नए दौर में प्रवेश करता है।
