मुर्शिदाबाद से 9 बांग्लादेशी गिरफ्तार, शुभेंदु सरकार के खौफ से भागने की फिराक में थे अवैध नागरिक

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पश्चिम बंगाल में इस समय दोतरफा राजनीतिक सफाई अभियान चल रहा है। एक तरफ जहां राज्य की त्रस्त जनता तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भ्रष्ट नेताओं को सड़कों पर ‘अंडा ट्रीटमेंट’ देकर अपना गुस्सा निकाल रही है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की नई भाजपा सरकार अवैध घुसपैठियों को बोरिया-बिस्तर समेटकर देश से बाहर करने के अपने मिशन में पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दे रही है।

इसी कड़ी में राज्य के सीमावर्ती जिले मुर्शिदाबाद से एक बड़ी कामयाबी सामने आई है, जिसने सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा तंत्र को एक बार फिर से हाई अलर्ट पर डाल दिया है।

भगवानगोला रेलवे स्टेशन पर बड़ी सर्जिकल कार्रवाई: 9 बांग्लादेशी दबोचे गए

मुर्शिदाबाद जिले में अवैध घुसपैठ के खिलाफ चलाए जा रहे एक सघन तलाशी अभियान के दौरान पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। खुफिया सूचनाओं के आधार पर पुलिस की एक विशेष टीम ने भगवानगोला रेलवे स्टेशन परिसर की घेराबंदी कर नौ बांग्लादेशी नागरिकों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

जब सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस ने इन गिरफ्तार नागरिकों को हिरासत में लेकर प्रारंभिक पूछताछ की, तो एक बेहद चौंकाने वाली हकीकत सामने आई। ये सभी घुसपैठिए देश के अलग-अलग राज्यों और हिस्सों में छुपकर अवैध रूप से मजदूरी और अन्य काम कर रहे थे। लेकिन पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद जिस तरह से राज्य पुलिस ने घुसपैठियों के खिलाफ शिकंजा कसा है, उसके डर से ये सभी गुप्त रास्तों के जरिए वापस बांग्लादेश भागने की फिराक में रेलवे स्टेशन पर जमा हुए थे।

जांच एजेंसियां अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही हैं कि ये लोग भारत की सीमा में किस रास्ते से दाखिल हुए, इन्हें देश के भीतर पनाह किसने दी और इन्हें अवैध रूप से रोजगार और नकली दस्तावेज किसने मुहैया कराए। पुलिस ने सभी नौ आरोपियों के खिलाफ विदेशी नागरिक अधिनियम (Foreigners Act) और अन्य संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की न्यायिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।

बंगाल से गुजरात और दक्षिण भारत तक फैला है ‘घुसपैठ का सिंडिकेट’

पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही अवैध घुसपैठियों के खिलाफ एक जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। एक-एक करके इन अवैध नागरिकों की पहचान की जा रही है और उन्हें उनके असली वतन वापस भेजने की कानूनी प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस कड़े प्रशासनिक हंटर का असर सिर्फ बंगाल तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसकी धमक पूरे देश में महसूस हो रही है।

इसी तरह का एक बड़ा अभियान पश्चिमी छोर पर गुजरात में भी चलाया जा रहा है, जिसे ‘ऑपरेशन डेल्टा हंट’ नाम दिया गया है। गुजरात पुलिस भी राज्य में छिपे बैठे अवैध घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर निकाल रही है।

इस कड़ी कार्रवाई का असर सुदूर दक्षिण भारत के राज्यों जैसे कर्नाटक और केरल में भी देखने को मिल रहा है। वहां की सुरक्षा रिपोर्टों में भी यह बात सामने आ चुकी है कि पिछले 10 से 15 सालों से लाखों अवैध बांग्लादेशी वहां छिपकर रह रहे हैं। सबसे गौर करने वाली बात यह है कि इन सभी का भारत में प्रवेश करने का पैटर्न बिल्कुल एक जैसा है। ये सभी सबसे पहले पश्चिम बंगाल की पोरस बॉर्डर के रास्ते भारत में घुसते थे और फिर वहां से ट्रेन पकड़कर देश के अलग-अलग कोनों में फैल जाते थे।

15 साल की तुष्टिकरण की राजनीति पर लगा विराम

सौ बात की एक बात यह है कि पिछले डेढ़ दशक तक पश्चिम बंगाल की सत्ता की चाबी ममता बनर्जी के हाथों में रही। यह पूरा घुसपैठ सिंडिकेट और उनका यह सुरक्षा-पैटर्न साफ तौर पर यह गवाही देता है कि इन अवैध नागरिकों को सिर्फ देश के संसाधनों पर डाका डालने के लिए ही नहीं, बल्कि एक खास वोट-बैंक को मजबूत करने के लिए सत्ता का खुला संरक्षण मिल रहा था।

लेकिन अब बंगाल की जनता ने भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण दोनों को नकार दिया है। शुभेंदु सरकार की यह त्वरित और कठोर कार्रवाई देश के उन सभी राज्यों के लिए एक नजीर है जो लंबे समय से घुसपैठ की समस्या से जूझ रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले इस पूरे सिंडिकेट का समूल नाश होना अब तय माना जा रहा है।

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