प्रभु श्री राम, माता सीता और श्री कृष्ण पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले वीडियो को करना होगा डाउन, ध्रुव राठी की बढ़ी मुश्किलें

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सोशल मीडिया पर अपने वीडियोज को लेकर अक्सर विवादों और चर्चाओं में रहने वाले मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी एक बार फिर बड़े कानूनी पचड़े में फंसते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस बार मामला बेहद संवेदनशील है, क्योंकि यह सीधे तौर पर देश के बहुसंख्यक समाज और करोड़ों सनातनी हिंदुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। ध्रुव राठी के खिलाफ उनके एक वीडियो में हिंदू देवी-देवताओं पर कथित तौर पर बेहद अमर्यादित और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में कानूनी कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

क्या है पूरा मामला और क्या हैं आरोप?

इस पूरे विवाद को लेकर एडवर्टाइजिंग और कानूनी क्षेत्र से जुड़ीं अधिवक्ता अमिता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कोर्ट में एक औपचारिक याचिका दायर कर यूट्यूबर ध्रुव राठी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। याचिका के अनुसार, ध्रुव राठी ने अपने एक यूट्यूब वीडियो में जानबूझकर मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम, माता सीता और योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है और उनकी छवि को गलत तरीके से पेश करने की कोशिश की है।

याचिकाकर्ता वकील अमिता का साफ कहना है कि अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर किसी भी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर या यूट्यूबर को यह अधिकार कतई नहीं दिया जा सकता कि वह करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं और सनातनी आस्था को सरेआम ठेस पहुंचाए। वीडियो में जिस तरह की भाषा और तर्कों का इस्तेमाल किया गया है, वह सीधे तौर पर समाज में वैमनस्य और अशांति फैलाने की श्रेणी में आता है।

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कानूनी शिकंजा और जनभावनाओं को ठेस पहुंचाने का प्रयास

अधिवक्ता अमिता की तरफ से दायर इस याचिका में यह दलील भी दी गई है कि ध्रुव राठी जैसे बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म और लाखों फॉलोअर्स वाले लोग जब इस तरह की भ्रामक और अमर्यादित टिप्पणियां करते हैं, तो इसका समाज के एक बड़े वर्ग पर नकारात्मक असर पड़ता है। वीडियो के जरिए हिंदू देवी-देवताओं के चरित्र और इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का यह प्रयास सीधे तौर पर कानूनी अपराध है।

विचारों की भिन्नता, राजनीतिक आलोचना और बौद्धिक विमर्श एक लोकतांत्रिक अधिकार हो सकते हैं, लेकिन जब विमर्श का स्तर इतना गिर जाए कि वह सदियों पुराने पूजनीय प्रतीकों को अपमानित करने लगे, तो वह कानून के दायरे में कड़ा दंड पाने योग्य बन जाता है।

याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि ध्रुव राठी के इस कृत्य को गंभीरता से लिया जाए और संबंधित कानूनी धाराओं के तहत उनके खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यूज और टीआरपी बटोरने के लिए धार्मिक मर्यादाओं को लांघने का दुस्साहस न कर सके।

अभिव्यक्ति की आज़ादी या आस्था का खुला अपमान?

सौ बात की एक बात यह है कि सोशल मीडिया की इस दुनिया में अब लोग लोकप्रियता और राजनीतिक नैरेटिव सेट करने की अंधी दौड़ में धार्मिक आस्थाओं को एक आसान टूल समझने लगे हैं। ध्रुव राठी के खिलाफ कोर्ट में दायर यह याचिका इस बात का एक और पुख्ता प्रमाण है कि अब सनातनी समाज अपनी आस्था और आराध्यों के अपमान पर मूकदर्शक बनकर चुप बैठने वाला नहीं है। अब देखना यह होगा कि अदालत इस याचिका को स्वीकार करते हुए ध्रुव राठी के खिलाफ क्या कानूनी दिशा-निर्देश जारी करती है।

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