मोदी सरकार के 12 साल: कैसे बदली भारत की टेक्नोलॉजी की कहानी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों में भारत की तकनीकी पहचान तेजी से बदली है। एक समय था जब भारत को मुख्य रूप से आईटी सेवाएं देने वाले देश के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब सरकार का लक्ष्य भारत को तकनीक का उपभोक्ता नहीं बल्कि निर्माता और वैश्विक तकनीकी शक्ति बनाना है।
बदलती दुनिया में बदली भारत की रणनीति
एक दौर में वैश्वीकरण के कारण दुनिया तेजी से जुड़ रही थी और भारत आईटी सेवाओं का बड़ा केंद्र बनकर उभरा। लेकिन कोविड-19 महामारी और अमेरिका-चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने वैश्विक सप्लाई चेन की कमजोरियां उजागर कर दीं। ऐसे में भारत ने खुद को एक भरोसेमंद तकनीकी और विनिर्माण साझेदार के रूप में स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाए।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बना बड़ी ताकत
मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को माना जाता है। आधार, डिजिटल पहचान प्रणाली और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने देश में डिजिटल लेनदेन को आसान बनाया है।आज छोटे दुकानदार से लेकर बड़े कारोबारी तक UPI का उपयोग कर रहे हैं। इसने डिजिटल भुगतान को आम लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण को भी तेज किया है।
ONDC के जरिए खुले डिजिटल बाजार की कोशिश
UPI की सफलता के बाद सरकार अब ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) के माध्यम से ई-कॉमर्स क्षेत्र में भी खुले और प्रतिस्पर्धी डिजिटल बाजार तैयार करने की कोशिश कर रही है। इसका उद्देश्य बड़े प्लेटफॉर्म्स के प्रभुत्व को कम कर छोटे कारोबारियों को अधिक अवसर देना है।
PLI योजना से बढ़ा इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण
भारत लंबे समय तक तकनीकी उत्पादों का बड़ा बाजार तो रहा, लेकिन निर्माण के क्षेत्र में पीछे था। इसे बदलने के लिए सरकार ने प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना शुरू की। इस योजना के तहत कंपनियों को भारत में उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन दिया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि स्मार्टफोन निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की कोशिश
आधुनिक तकनीक की रीढ़ माने जाने वाले सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में भी भारत तेजी से आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है। इसी उद्देश्य से इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन शुरू किया गया।हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि सेमीकंडक्टर निर्माण बेहद जटिल प्रक्रिया है और भारत को ताइवान, दक्षिण कोरिया तथा अमेरिका जैसे देशों की बराबरी करने में अभी समय लगेगा।
AI और अंतरिक्ष क्षेत्र पर भी फोकस
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते महत्व को देखते हुए सरकार ने इंडिया AI मिशन शुरू किया है। इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं और डेवलपर्स को बेहतर कंप्यूटिंग संसाधन उपलब्ध कराना है। इसके अलावा अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई सुधार किए गए हैं। IN-SPACe जैसी पहल के बाद भारतीय स्पेस स्टार्टअप्स की संख्या लगातार बढ़ रही है।
