1965 का वो काला सच: जब पाक ने हवा में मार गिराया था गुजरात के CM का विमान; आज के ‘मजबूत भारत’ की हुंकार देख कांपता है पाकिस्तान
नवाचार और कड़े नेतृत्व वाले आज के महाशक्तिशाली भारत को देखकर क्या आप कभी ऐसी कल्पना भी कर सकते हैं कि भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ा हो और दुश्मन देश हमारे किसी राज्य के मुख्यमंत्री की सरेआम हत्या कर दे?
आज का नया भारत देखकर हर कोई यही कहेगा यह सर्वथा नामुमकिन है! आज का भारत वो देश है जिसकी तरफ अगर पाकिस्तान ने आंख उठाने की हिमाकत भी की, तो उसका नामोनिशान दुनिया के नक्शे से मिटा दिया जाएगा। लेकिन इतिहास के पन्नों में एक ऐसा खौफनाक, शर्मनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया दर्ज है, जिसे आज की पीढ़ी शायद नहीं जानती। यह घटना तब हुई थी जब देश में कांग्रेस का राज था और पाकिस्तानी एयरफोर्स ने हमारे एक राज्य के मुख्यमंत्री के नागरिक विमान पर कायरतापूर्ण हमला करके उन्हें सरेआम मौत के घाट उतार दिया था।
आइए जानते हैं इतिहास का वो कड़वा सच, जब हमारे देश की संप्रभुता के साथ खिलवाड़ किया गया और तत्कालीन सरकार अपने नेता की मौत पर कड़ा प्रतिशोध लेने में नाकाम रही।
19 सितंबर 1965: जब सीमा पर निकले थे CM बलवंतराय मेहता
साल 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच मैदान-ए-जंग में भीषण युद्ध चल रहा था। सीमा पर तोपें गरज रही थीं। इसी बीच 19 सितंबर को गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता ने कच्छ सीमा पर जमीनी स्थिति का जायजा लेने और जवानों का हौसला बढ़ाने के लिए खुद मोर्चे पर निकलने का फैसला किया।
- समय: दोपहर करीब 1:30 बजे
- स्थान: अहमदाबाद हवाई अड्डा
- विमान: ‘बीचक्राफ्ट’ (एक बेहद छोटा नागरिक विमान)
इस विमान में किसी भी तरह के हथियार, मिसाइल या सुरक्षा कवच नहीं थे। विमान में मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता के साथ उनकी धर्मपत्नी सरोजबेन, उनके तीन सहयोगी, एक पत्रकार और विमान के दो क्रू मेंबर सवार थे। इस असैन्य विमान की कमान द्वितीय विश्व युद्ध के जांबाज और अनुभवी पायलट जहांगीर ‘जंगू’ इंजीनियर के हाथों में थी।
निहत्थे विमान पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री का विमान जब मीठापुर की तरफ बढ़ रहा था, तभी पाकिस्तानी राडार और ग्राउंड कंट्रोल की नजर इस निहत्थे विमान पर पड़ी। भारतीय सीमा के पास एक अज्ञात विमान को उड़ते देख, पाकिस्तान एयरफोर्स (PAF) ने तुरंत अपने F-86 सैबर जेट लड़ाकू विमानों को उसे इंटरसेप्ट करने के लिए हवा में भेज दिया।
उस पाकिस्तानी फाइटर जेट को उड़ा रहा था फ्लाइंग ऑफिसर कैस हुसैन। जब कैस हुसैन अपने अत्याधुनिक हथियारों से लैस लड़ाकू विमान के साथ उस छोटे से ‘बीचक्राफ्ट’ के करीब पहुंचा, तो उसे आसमान में बिल्कुल साफ-साफ दिख गया कि यह कोई सैन्य या लड़ाकू विमान नहीं है, बल्कि एक निहत्था, छोटा नागरिक विमान है। लेकिन कायरता जिसकी रगों में खून बनकर बहती हो, उससे इंसानियत या युद्ध के नियमों की उम्मीद करना ही बेकार है।
अंतरराष्ट्रीय नियमों को पैरों तले कुचला
जब भारतीय पायलट जहांगीर इंजीनियर ने देखा कि एक खूंखार पाकिस्तानी लड़ाकू विमान ने उन्हें घेर लिया है, तो उन्होंने अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के मुताबिक अपने विमान के पंखों (Wings) को ऊपर-नीचे हिलाना शुरू कर दिया। विमानन की भाषा में इसका मतलब होता है “हम निहत्थे नागरिक हैं, हम आत्मसरंंपण कर रहे हैं, कृपया हम पर रहम करें, हम युद्ध का हिस्सा नहीं हैं।”
हवा में आग का गोला बना विमान, सभी 8 लोगों की मौत
पाकिस्तानी पायलट कैस हुसैन के सिर पर नफरत का भूत सवार था। उसने अंतरराष्ट्रीय नियमों को ताक पर रखते हुए उस निहत्थे नागरिक विमान पर अपने फाइटर जेट से अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। पहली गोली सीधे विमान के बाएं पंख पर लगी, जिससे विमान डगमगा गया। दूसरी गोली लगते ही विमान के इंजन में भयानक आग लग गई। देखते ही देखते मुख्यमंत्री का विमान हवा में आग का गोला बन गया और कच्छ के सुथारी गांव के पास जाकर क्रैश हो गया। इस दर्दनाक और जघन्य हादसे में गुजरात के मुख्यमंत्री बलवंतराय मेहता, उनकी पत्नी सरोजबेन और जांबाज पायलट जहांगीर इंजीनियर सहित विमान में सवार सभी 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
‘कमजोर’ दौर बनाम ‘नया भारत’
यह भारत के इतिहास का एक ऐसा काला पन्ना था, जिसने पूरे देश की आत्मा को झकझोर कर रख दिया था। लेकिन अफ़सोस, वो कांग्रेस का कमजोर दौर था। हमारे देश के मुख्यमंत्री को हवा में मार दिया गया और भारत कड़ा विरोध दर्ज कराने और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रोने के अलावा कुछ नहीं कर सका।
आज हमारा नेतृत्व थप्पड़ का जवाब थप्पड़ से नहीं, बल्कि दुश्मन के घर में घुसकर उसका जबड़ा तोड़कर देता है। आज के नए भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक देखी है। पिछले साल “ऑपरेशन सिंदूर” का वो दौर याद कीजिए, जब भारत ने पाकिस्तानी एयरफोर्स का बेस तक उड़ा दिया था। हमारी सेना का वो रौद्र रूप और खौफ देखकर पाकिस्तानी सेना और वहां के हुक्मरान पूरी दुनिया के सामने रहम की भीख मांग रहे थे। पाकिस्तान घुटनों पर आकर हाथ जोड़कर युद्ध रोकने की गुहार लगा रहा था, तब जाकर भारत ने अपनी दया दिखाई थी।
युद्ध रोकने के बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को सरेआम और दोटूक चेतावनी दी थी कि “अभी ऑपरेशन सिंदूर जारी है। अगर पाकिस्तान ने दोबारा कोई नापाक कोशिश की, तो अंजाम बहुत बुरा होगा।”
