बिहार के मधुबनी से मौलाना गिरफ्तार, ATS को पाकिस्तान कनेक्शन के संकेत; कट्टरपंथी नेटवर्क की जांच तेज

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लाल घेरे में गिरफ्तार किया गया मौलाना

बिहार के मधुबनी जिले से हुई एक गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। मध्य प्रदेश ATS और बिहार ATS की संयुक्त कार्रवाई में मौलाना इजहार-उल-हक को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इजहार-उल-हक का संबंध एक ऐसे कथित कट्टरपंथी मॉड्यूल से है, जिसके तार पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।

फिलहाल एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गतिविधियों, इसके विस्तार और संभावित उद्देश्यों की जांच में जुटी हुई हैं।

भोपाल से शुरू हुई जांच, कई राज्यों तक पहुंचे तार

मामले की शुरुआत मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हुई थी। ATS ने सबसे पहले मोहम्मद फराज नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के दौरान राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार तक फैले एक कथित नेटवर्क के संकेत मिले।

इसके बाद विभिन्न राज्यों में जांच का दायरा बढ़ाया गया और कई संदिग्धों से पूछताछ की गई। इसी क्रम में बिहार के मधुबनी से मौलाना इजहार-उल-हक को गिरफ्तार किया गया।

जांच एजेंसियों का दावा है कि यह नेटवर्क ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लिकेशन के जरिए संचालित किया जा रहा था।

मौलाना इजहार-उल-हक पर क्या आरोप हैं?

ATS के अनुसार इजहार-उल-हक की भूमिका कथित तौर पर नेटवर्क के विस्तार और नए लोगों को जोड़ने से संबंधित थी। जांच एजेंसियों का आरोप है कि वह युवाओं की पहचान करता था और उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित करने की कोशिश करता था।

अधिकारियों के मुताबिक प्रारंभिक जांच में ऐसे डिजिटल साक्ष्य मिले हैं जिनसे संकेत मिलता है कि आरोपी कथित रूप से पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के संपर्क में था। एजेंसियां अब इन संपर्कों की प्रकृति और उद्देश्य की विस्तृत जांच कर रही हैं।

पाकिस्तान कनेक्शन की जांच

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जांच एजेंसियों को कुछ ऐसे इनपुट मिले हैं जो पाकिस्तान से संभावित संपर्क की ओर इशारा करते हैं। बिहार ATS के अधिकारियों ने भी प्रारंभिक जांच में पाकिस्तान कनेक्शन के संकेत मिलने की बात कही है।

हालांकि एजेंसियों का कहना है कि इस संबंध में कई पहलुओं की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।

क्लोज्ड नेटवर्क के जरिए चल रही थी गतिविधियां

ATS का दावा है कि यह कोई सामान्य सोशल मीडिया ग्रुप नहीं था। जांचकर्ताओं के अनुसार यह एक सीमित और नियंत्रित नेटवर्क था, जहां विशेष प्रकार की सामग्री साझा की जाती थी और नए सदस्यों को जोड़ने का प्रयास किया जाता था।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नेटवर्क में कितने लोग सक्रिय थे, उनकी भूमिका क्या थी और वे किन-किन राज्यों में फैले हुए थे।

क्या स्लीपर सेल तैयार करने की थी कोशिश?

जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि क्या इस नेटवर्क का उद्देश्य भारत में स्लीपर सेल तैयार करना था। एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि नेटवर्क केवल वैचारिक गतिविधियों तक सीमित था या इसके पीछे किसी बड़ी साजिश की तैयारी भी चल रही थी।

सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यदि ऐसे नेटवर्क समय रहते सामने नहीं आते, तो वे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं।

कई पहलुओं पर जारी है जांच

फिलहाल इजहार-उल-हक से पूछताछ की जा रही है और उसके डिजिटल उपकरणों, संपर्कों तथा वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि नेटवर्क का संचालन किस स्तर पर हो रहा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।

मधुबनी से लेकर भोपाल तक फैली इस जांच ने सुरक्षा एजेंसियों को एक ऐसे कथित नेटवर्क तक पहुंचाया है, जिसे वे राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से गंभीरता से देख रही हैं।

आने वाले दिनों में पूछताछ और डिजिटल फॉरेंसिक जांच के आधार पर इस मामले में और बड़े खुलासे सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

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