तमिलनाडु में गहराया बिजली संकट: विपक्ष के निशाने पर सीएम विजय की TVK सरकार, बैकफुट पर आई कांग्रेस

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Tamilnadu Power Cut: तमिलनाडु में बड़े-बड़े वादों के साथ सत्ता में आई अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय की तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) सरकार अपने शुरुआती कार्यकाल में ही बड़े संकटों से घिरती नजर आ रही है। राज्य में गहराते बिजली संकट और अघोषित पावर कट ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के झुलसाते तापमान के बीच राज्य भर में हो रही भारी बिजली कटौती को लेकर अब सियासत पूरी तरह गरमा गई है। DMK और AIADMK जैसी प्रमुख विपक्षी पार्टियां जहां विजय सरकार को घेर रही हैं, वहीं इस मुद्दे पर कांग्रेस की चुप्पी भी बड़े सवाल खड़े कर रही है।

12 घंटे तक का पावर कट

तमिलनाडु इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है, जहां पारा 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है। ऐसे समय में राज्य की राजधानी चेन्नई से लेकर कन्याकुमारी तक पूरा प्रदेश भीषण बिजली कटौती का सामना कर रहा है। बिना किसी पूर्व सूचना या प्लानिंग के राज्य भर में 6 से 12 घंटे तक का पावर कट किया जा रहा है। इस संकट का सबसे बुरा असर आम जनजीवन और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है:

  • अस्पतालों में हाहाकार: अस्पतालों में भर्ती मरीज और घरों पर ऑक्सीजन व वेंटिलेटर के सहारे जी रहे बुजुर्गों के लिए यह स्थिति जीवन-मरण का सवाल बन गई है।
  • बच्चों और बुजुर्गों का हाल बेहाल: भीषण गर्मी के कारण छोटे बच्चे सो नहीं पा रहे हैं और बीमार लोग तड़पने को मजबूर हैं।
  • जनता में भारी आक्रोश: सोशल मीडिया पर ‘बदलाव’ के नाम पर वोट मांगने वाले मुख्यमंत्री विजय पर अब जनता ठगा हुआ महसूस कर रही है।

विपक्ष के तीखे हमले

बिजली संकट को लेकर विपक्ष ने मुख्यमंत्री विजय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सत्तारूढ़ दल को घेरते हुए विपक्षी नेताओं ने तीखे बयान जारी किए हैं। DMK के वरिष्ठ नेता और पूर्व बिजली मंत्री वी सेंथिलबालाजी ने विजय सरकार पर सीधा और जोरदार हमला बोलते हुए कहा:

“सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरने और रील्स के जरिए वाहवाही लूटने के बजाय, मुख्यमंत्री को अब जमीन पर आना चाहिए। इस मौजूदा बिजली संकट को हल करने के लिए तत्काल और युद्धस्तर पर कार्रवाई की जरूरत है। जनता ने आपको सरकार चलाने के लिए चुना है, किसी पब्लिसिटी स्टंट के लिए नहीं।”

AIADMK ने उठाए आंकड़ों पर सवाल

वहीं, AIADMK के महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री इडापड्डी के. पलानीस्वामी (EPS) ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। EPS का दावा है कि इस अघोषित बिजली कटौती ने राज्य की आर्थिक रीढ़ की हड्डी तोड़ दी है। बिजली न होने से छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं, जिससे प्रोडक्शन ठप हो गया है और व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।

बैकफुट पर आई कांग्रेस

इस बिजली संकट ने केवल TVK सरकार ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के लिए भी बहुत बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है। तमिलनाडु की राजनीति में बन रहे नए समीकरणों के बीच कांग्रेस पूरी तरह बैकफुट पर है। जनता का गुस्सा सिर्फ सीएम विजय पर ही नहीं, बल्कि उनके सहयोगियों और इस पूरे मामले पर मौन साधे बैठी कांग्रेस पर भी फूट रहा है। विपक्ष अब कांग्रेस की राष्ट्रीय लीडरशिप से सवाल पूछ रहा है कि जो कांग्रेस देश भर के मुद्दों पर ज्ञान बांटती है, वह तमिलनाडु की जनता की इस बदहाली पर चुप क्यों है? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के लिए यह स्थिति ‘न उगलते बन रहा है, न निगलते’ जैसी हो गई है।

रील्स से लेकर सत्ता की हकीकत तक का सफर

राजनीति में एंट्री करना, रैलियों में भारी भीड़ जुटाना और फिल्मी डायलॉग्स से तालियां बटोरना आसान हो सकता है, लेकिन जब सत्ता की जिम्मेदारी कंधों पर आती है, तो हकीकत से सामना होता है। विजय की TVK सरकार अपने पहले ही बड़े प्रशासनिक इम्तिहान में पूरी तरह फेल साबित होती दिख रही है। अगर राज्य को जल्द ही इस अंधेरे और बिजली संकट से नहीं निकाला गया, तो जो जनता आज सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रही है, वह आने वाले समय में इस सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर सकती है।

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