क्या बिहार के डिप्टी सीएम ने एक्सप्रेसवे बनने में किया घोटाला? आख़िर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में ऐसा क्या है?
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बिहार में बन रहे महत्वाकांक्षी पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे को लेकर एक नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है। इसकी वजह बनी Indian Express की एक रिपोर्ट, जिसमें दावा किया गया कि एक्सप्रेसवे के एक हिस्से का एलाइनमेंट बदला गया और इससे बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के एक करीबी की जमीन को फायदा पहुंचा। रिपोर्ट सामने आते ही विपक्षी दलों, खासकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD), ने राज्य सरकार और एनडीए पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
हालांकि, मामला तब नया मोड़ ले गया जब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने आधिकारिक बयान जारी कर रिपोर्ट में किए गए दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक बताया।
क्या था Indian Express का दावा?
Indian Express की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के एक हिस्से का रूट बदला गया और इस बदलाव से उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के एक परिचित की जमीन प्रभावित होने से बच गई।
रिपोर्ट में कुछ शिकायतकर्ताओं के हवाले से यह दावा किया गया था कि परियोजना के एलाइनमेंट में बदलाव जनहित के बजाय कुछ विशेष लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया।
रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया और RJD ने इसे कथित भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग से जोड़कर उठाना शुरू कर दिया।
विजय कुमार चौधरी ने आरोपों को नकारा
रिपोर्ट में जिन लोगों का नाम लिया गया था, उनसे भी Indian Express ने बात की थी। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने आरोपों से साफ इनकार किया।
वहीं जिस व्यक्ति की जमीन को लेकर विवाद खड़ा किया गया, उसने भी आरोपों को निराधार बताया और कहा कि परियोजना के एलाइनमेंट में किसी प्रकार का बदलाव उनके हित में नहीं किया गया।
हालांकि विपक्ष ने इन स्पष्टीकरणों को स्वीकार नहीं किया और मामले की जांच की मांग जारी रखी।
NHAI ने जारी किया स्पष्टीकरण
विवाद बढ़ने के बाद NHAI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आधिकारिक बयान जारी किया।
NHAI ने कहा कि समस्तीपुर जिले में पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट को लेकर 15 जून 2026 को प्रकाशित समाचार “तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक” है।
प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि समस्तीपुर जिले के सरायरंजन क्षेत्र में किलोमीटर 48 से किलोमीटर 53 के बीच स्वीकृत एलाइनमेंट में किसी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
NHAI के अनुसार, 6 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना उसी एलाइनमेंट से संबंधित थी, जिसे जनवरी 2025 में सक्षम प्राधिकरण (AAC) द्वारा पहले ही मंजूरी दी जा चुकी थी।
क्या बदला गया था एलाइनमेंट?
NHAI के बयान के अनुसार, परियोजना के संबंधित हिस्से में कोई नया बदलाव नहीं किया गया। प्राधिकरण का कहना है कि जिस एलाइनमेंट को लेकर विवाद खड़ा किया गया, वह पहले से स्वीकृत योजना का ही हिस्सा था।
यानी NHAI का दावा है कि जिस बदलाव को रिपोर्ट में नया निर्णय बताया गया, वह वास्तव में पहले से अनुमोदित परियोजना का हिस्सा था।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
मामले के सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
विपक्षी दलों का कहना है कि परियोजना से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के संदेह की गुंजाइश न रहे।
दूसरी ओर एनडीए नेताओं का कहना है कि बिना तथ्यों की पूरी जांच किए राजनीतिक आरोप लगाए गए और NHAI के स्पष्टीकरण के बाद विवाद की वास्तविक तस्वीर सामने आ चुकी है।
सवाल अभी भी कायम
हालांकि NHAI ने रिपोर्ट को भ्रामक बताया है, लेकिन इस पूरे विवाद ने एक बार फिर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता और सूचना के प्रवाह को लेकर बहस छेड़ दी है।
अब सवाल यह है कि क्या शिकायतकर्ताओं के दावे तथ्यों पर आधारित थे, या फिर परियोजना को लेकर गलतफहमियों ने विवाद को जन्म दिया? यह बहस आने वाले दिनों में भी जारी रह सकती है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि NHAI ने आधिकारिक तौर पर किसी भी एलाइनमेंट बदलाव से इनकार किया है और परियोजना को पूर्व स्वीकृत योजना के अनुसार आगे बढ़ाए जाने की बात कही है।
