राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका, क्या आलाकमान ने अनसुनी कर दी थी सही सलाह?
कांग्रेस की राजनीति में इन दिनों एक नया विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। पार्टी के भीतर ही अब ऐसे सवाल उठने लगे हैं कि क्या कांग्रेस नेतृत्व ने एक बार फिर गलत राजनीतिक फैसला लिया? मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद पार्टी की रणनीति और नेतृत्व दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस के ही एक वरिष्ठ नेता की पुरानी चेतावनी फिर से चर्चा में आ गई है।
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन हुआ खारिज
मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। लेकिन नामांकन पत्रों की जांच के दौरान उनका नामांकन रद्द कर दिया गया।
नामांकन रद्द होने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि क्या कांग्रेस नेतृत्व से उम्मीदवार चयन के दौरान कोई बड़ी चूक हुई थी। इसी बहस के बीच कांग्रेस नेता नरेश ज्ञानचंदानी की पुरानी टिप्पणी फिर सुर्खियों में आ गई है।
कांग्रेस नेता ने पहले ही जताई थी आपत्ति
जब कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाने का फैसला किया था, उसी समय वरिष्ठ कांग्रेस नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने सार्वजनिक रूप से इस निर्णय पर सवाल उठाए थे।
उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को टैग करते हुए कहा था कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा उम्मीदवार के चयन में पार्टी बड़ी गलती कर रही है। उनका मानना था कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को दोबारा राज्यसभा भेजना कांग्रेस के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प होता।

ज्ञानचंदानी का तर्क था कि दिग्विजय सिंह जैसे अनुभवी नेता के मामले में तकनीकी त्रुटियों या राजनीतिक जोखिम की संभावना बेहद कम रहती। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने उनकी सलाह को महत्व नहीं दिया और मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार घोषित कर दिया।
अब फिर चर्चा में आई पुरानी चेतावनी
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस के भीतर और बाहर कई लोग नरेश ज्ञानचंदानी की बात को याद कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि कांग्रेस ने अनुभवी उम्मीदवार को मैदान में उतारा होता तो शायद ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।
इसी वजह से अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस आलाकमान ने समय रहते सही सलाह को नजरअंदाज कर दिया।
वरिष्ठ पत्रकार ने भी उठाए सवाल
वरिष्ठ पत्रकार प्रभु पटेरिया ने भी इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि अब ऐसा लग रहा है कि नरेश ज्ञानचंदानी की आशंकाएं सही साबित हुईं। पटेरिया के अनुसार, कांग्रेस के खाते में जाती हुई राज्यसभा सीट एक तकनीकी चूक की वजह से हाथ से निकल गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि बीजेपी ने इस संभावना को पहले ही भांप लिया था, इसलिए उसने तीसरी सीट पर भी अपना अधिकृत उम्मीदवार उतार दिया।

आखिर नामांकन क्यों हुआ रद्द?
बीजेपी की ओर से आरोप लगाया गया कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन पत्र में तेलंगाना में चल रहे एक लंबित मामले की जानकारी नहीं दी थी, जबकि नियमों के अनुसार इसका उल्लेख करना आवश्यक था।
बीजेपी ने इसी आधार पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
दूसरी तरफ कांग्रेस का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह अनुचित है और राजनीतिक कारणों से लिया गया है। पार्टी का आरोप है कि बीजेपी ने पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के बावजूद तीसरी राज्यसभा सीट हासिल करने के लिए रणनीतिक तरीके से दबाव बनाया।
रिटर्निंग ऑफिसर ने क्या फैसला दिया?
रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने बीजेपी की आपत्ति को स्वीकार करते हुए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया। इसके बाद राज्यसभा की तीसरी सीट पर बीजेपी की स्थिति मजबूत हो गई और उसके उम्मीदवार की जीत का रास्ता लगभग साफ हो गया।
मीनाक्षी नटराजन ने क्या कहा?
नामांकन रद्द होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने फैसले पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने पर्याप्त वोट न होने के बावजूद तीसरा उम्मीदवार उतारा था और कांग्रेस को पहले से आशंका थी कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान बाधाएं खड़ी की जाएंगी। नटराजन ने कहा कि उनकी पार्टी इस फैसले को लोकतांत्रिक और संवैधानिक मंचों पर चुनौती देगी और कानूनी लड़ाई जारी रखेगी।
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के इस घटनाक्रम ने कांग्रेस नेतृत्व की रणनीति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की है कि क्या उम्मीदवार चयन के समय पार्टी ने अनुभवी नेताओं की सलाह को नजरअंदाज कर दिया था। आने वाले दिनों में यह विवाद कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और राज्यसभा चुनाव दोनों पर असर डाल सकता है।
