यूट्यूबर की गिरफ्तारी पर बवाल: सीएम विजय की सरकार पर उठे सवाल, विपक्ष ने लगाया तानाशाही का आरोप
तमिलनाडु की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रसिद्ध यूट्यूबर मारिदास की गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री विजय की सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार आलोचनात्मक आवाजों को दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कौन हैं मारिदास?
मारिदास तमिलनाडु के एक चर्चित यूट्यूबर हैं, जिनके सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं। वे अपनी राजनीतिक टिप्पणियों और समसामयिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने के लिए जाने जाते हैं। अतीत में भी उनकी टिप्पणियों को लेकर कई विवाद सामने आ चुके हैं और उनके खिलाफ विभिन्न मामलों में शिकायतें दर्ज हुई हैं।
हाल के दिनों में मारिदास ने मुख्यमंत्री विजय और उनकी सरकार के कामकाज को लेकर कई वीडियो और टिप्पणियां सोशल मीडिया पर साझा की थीं। इन्हीं टिप्पणियों को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है।
चेन्नई पुलिस ने की गिरफ्तारी
जानकारी के अनुसार, चेन्नई साइबर क्राइम विंग की एक विशेष टीम ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए मारिदास को उनके सूर्य नगर स्थित आवास से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें पूछताछ के लिए ले जाया गया, जहां उनसे मामले को लेकर पूछताछ जारी है।
पुलिस ने मारिदास के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79 और 353(2) के अलावा आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत मामला दर्ज किया है।
बताया जा रहा है कि राज्य सरकार और उसके कामकाज को लेकर लगातार लगाए जा रहे आरोपों तथा सोशल मीडिया पर साझा की गई आलोचनात्मक टिप्पणियों के आधार पर साइबर अपराध विभाग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया।
गिरफ्तारी से पहले किया था पोस्ट
गिरफ्तारी से पहले मारिदास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट साझा कर दावा किया था कि उन्हें गिरफ्तार करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी उनके घर पहुंचे हैं।
उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “मुझे गिरफ्तार करने के लिए मदुरै स्थित मेरे घर पर 10 से अधिक पुलिस अधिकारी आए हैं।”
इस पोस्ट के वायरल होने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया।

विपक्ष ने सरकार को घेरा
मारिदास की गिरफ्तारी के बाद विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री विजय की सरकार पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार आलोचना को बर्दाश्त नहीं कर रही और असहमति की आवाजों को दबाने का प्रयास कर रही है। कई विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना नागरिकों का अधिकार है और इस तरह की कार्रवाई गलत संदेश देती है।
भाजपा ने भी उठाए सवाल
भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। भाजपा की वरिष्ठ नेता तमिलिसाई सौंदरराजन ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विजय सत्ता में आने से पहले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों की जोरदार वकालत करते थे। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों की गिरफ्तारी का पहले विरोध किया जाता था, लेकिन अब आलोचकों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, जिससे कई सवाल खड़े होते हैं।
