NEET विवाद: कांग्रेस में अलग-अलग सुर? दिग्विजय सिंह ने PM मोदी के रुख को सराहा, उधर राहुल गांधी ने ‘सीबीएसई फीस’ पर घेरा
नई दिल्ली: नीट (NEET-UG) परीक्षा विवाद को लेकर देश में मचे सियासी घमासान के बीच कांग्रेस पार्टी के भीतर से दो अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए हैं। एक तरफ जहां लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री पर लगातार हमलावर हैं, वहीं कांग्रेस के दिग्गज नेता और शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने परीक्षा प्रणाली को सुधारने के लिए पीएम मोदी के ‘जवाबदेही वाले रुख’ की सराहना की है।
संसदीय समिति की अहम बैठक के बाद यह दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अधिकारी भी पेश हुए थे।
‘जब शीर्ष नेतृत्व जिम्मेदारी ले, तो स्वागत होना चाहिए’ – दिग्विजय सिंह
सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को हुई शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति की बैठक में परीक्षा सुधारों और एनटीए की कार्यप्रणाली पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक के दौरान दिग्विजय सिंह ने एक सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि जब देश का शीर्ष नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के सामने परीक्षा प्रणाली को सुधारने की जवाबदेही स्वीकार कर रहा है, तो हमें इसकी सराहना करनी चाहिए।
पीएम के नाम संदेश का सुझाव: दिग्विजय सिंह ने कहा कि 21 जून को होने वाली दोबारा परीक्षा (Re-test) के लिए छात्रों और अभिभावकों में भरोसा जगाना बेहद जरूरी है। इसके लिए उन्होंने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को छात्रों के नाम एक खुला पत्र या संदेश लिखना चाहिए, ताकि छात्र खुद को अकेला न समझें। उन्होंने आगामी परीक्षा के सफल आयोजन के लिए अधिकारियों को शुभकामनाएं भी दीं।
राहुल गांधी का सरकार पर तीखा हमला: ‘सीबीएसई के जेबकतरों से सावधान’
एक तरफ जहां दिग्विजय सिंह का रुख सकारात्मक दिखा, वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी ने सीबीएसई (CBSE) की पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) फीस को लेकर मोदी सरकार पर ‘जेबकतरे’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए तीखा प्रहार किया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर छात्रों के साथ बातचीत का एक वीडियो साझा करते हुए लिखा कि जब शिक्षा को सेवा के बजाय बिजनेस बना दिया जाता है, तो गलतियां सुधारी नहीं जातीं बल्कि और बढ़ा दी जाती हैं।
राहुल गांधी ने उठाए ये बड़े सवाल:
- महंगी फीस का बोझ: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सीबीएसई की गलतियों की वजह से कम नंबर आने पर डिजिटल स्कैन कॉपी के लिए 100 रुपये प्रति विषय, री-काउंटिंग के लिए 100 रुपये प्रति पेपर और पुनर्मूल्यांकन के लिए 25 रुपये प्रति सवाल वसूले जा रहे हैं।
- 2000 रुपये का खर्च: अपनी ही आंसर-शीट की सही जांच करवाने के लिए एक छात्र को लगभग 2,000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
- करोड़ों की कमाई का आरोप: राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब लगभग 4 लाख छात्र इस प्रक्रिया के लिए आवेदन करते हैं, तो जरा सोचिए कि सीबीएसई इसके जरिए कितनी बड़ी कमाई कर रही है।
संसदीय समिति में राजनीति पर क्या बोले दिग्विजय?
बैठक के दौरान जब भाजपा से जुड़े सदस्यों ने विपक्ष से सवाल किया कि नीट परीक्षा और जांच के नाम पर राजनीति क्यों की जा रही है, तो समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने साफ किया कि इसमें राजनीति का कोई सवाल ही नहीं है। यह पूरा मामला देश के लाखों छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है।
