उत्तराखंड बना भारत का छठा पूर्ण साक्षर राज्य, 98% से अधिक साक्षरता दर के साथ रचा इतिहास

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उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए खुद को भारत का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बना लिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और केंद्र सरकार के ‘उल्लास’ (ULLAS – Understanding of Lifelong Learning for All in Society) कार्यक्रम के तहत निर्धारित वयस्क साक्षरता मानकों को पूरा करने के बाद राज्य को आधिकारिक रूप से पूर्ण साक्षर घोषित किया गया। इस घोषणा को 8 जुलाई को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह की मंजूरी मिलने के बाद अंतिम रूप दिया गया।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड की साक्षरता दर अब 98 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। इस उपलब्धि के साथ राज्य अब मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के बाद पूर्ण साक्षर राज्यों की सूची में शामिल हो गया है।

पूर्ण साक्षर राज्य का क्या अर्थ है?

‘पूर्ण साक्षर’ होने का अर्थ यह नहीं है कि राज्य के 100 प्रतिशत नागरिक पढ़े-लिखे हों। शिक्षा मंत्रालय के तहत लागू उल्लास कार्यक्रम के मानकों के अनुसार, यदि किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की साक्षरता दर 95 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाती है, तो उसे पूर्ण साक्षर माना जाता है। यह मानक विशेष रूप से वयस्क साक्षरता को ध्यान में रखकर निर्धारित किया गया है।

क्या है उल्लास कार्यक्रम?

उल्लास (New India Literacy Programme) का उद्देश्य केवल लोगों को पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं है, बल्कि उन्हें दैनिक जीवन के लिए आवश्यक कौशल भी प्रदान करना है। इस कार्यक्रम के तहत 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के उन लोगों को साक्षर बनाया जाता है, जो किसी कारणवश औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए थे। इसके अंतर्गत बुनियादी साक्षरता के साथ-साथ डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, जीवन कौशल और सतत शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।

मुख्यमंत्री ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि को राज्य के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह सरकार, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और आम जनता के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि शिक्षा के क्षेत्र में यह उपलब्धि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।

देशभर में भी उल्लास कार्यक्रम के माध्यम से बड़ी संख्या में वयस्कों को साक्षर बनाने का अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल साक्षरता बढ़ाना नहीं, बल्कि नागरिकों को बदलते समय के अनुरूप आवश्यक ज्ञान और कौशल से भी सशक्त बनाना है। उत्तराखंड की यह उपलब्धि इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

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